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अमेठी में DM का औचक निरीक्षण, बच्चों को खुद पढ़ाया पाठ; बंद शौचालय और खराब पेयजल व्यवस्था पर नाराजगी

134 बच्चों के नामांकन पर स्कूल में मिले 5 शिक्षक, आंगनबाड़ी केंद्र का RO भी बंद; DM शशांक चौधरी ने शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया

Pawan Kumar
Pawan Kumar

3 मिनट अमेठी

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अमेठी में DM का औचक निरीक्षण, बच्चों को खुद पढ़ाया पाठ; बंद शौचालय और खराब पेयजल व्यवस्था पर नाराजगी

अमेठी। जिले में शिक्षा व्यवस्था और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं की हकीकत जानने के लिए जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने एक स्कूल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने न केवल स्कूल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि बच्चों के बीच पहुंचकर खुद उन्हें पढ़ाया और उनकी पढ़ाई का स्तर भी परखा। इस दौरान शौचालय बंद मिलने और पेयजल व्यवस्था में खामियां सामने आने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई।

 बच्चों के बीच पहुंचे DM, खुद पढ़ाया पाठ

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने कक्षा में पहुंचकर बच्चों से बातचीत की और उन्हें पाठ पढ़ाया। उन्होंने बच्चों की शैक्षिक स्थिति को समझने का प्रयास किया। इस तरह उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि स्कूल में पढ़ाई किस तरह चल रही है और बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा मिल रही है या नहीं।

जिलाधिकारी के निरीक्षण का उद्देश्य स्कूल में शिक्षण व्यवस्था के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति का आकलन करना भी था। बच्चों की शिक्षा को लेकर उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि स्कूलों में पढ़ाई और व्यवस्थाओं की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

 134 बच्चों के नामांकन पर पांच शिक्षक मिले उपस्थित

निरीक्षण के दौरान स्कूल में 134 बच्चों का नामांकन बताया गया, जबकि मौके पर पांच शिक्षक उपस्थित मिले। जिलाधिकारी ने स्कूल की शैक्षिक व्यवस्था का जायजा लिया और उपलब्ध संसाधनों के बीच बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सरकारी स्कूलों में बच्चों की नियमित पढ़ाई, शिक्षकों की जिम्मेदारी और विद्यालय की व्यवस्थाएं शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति के आधार पर संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की जरूरत बताई गई।

 बंद शौचालय और पेयजल व्यवस्था पर जताई नाराजगी

स्कूल में शौचालय बंद मिलने और पेयजल व्यवस्था ठीक नहीं होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल और उपयोग योग्य शौचालय जैसी सुविधाएं बेहद जरूरी हैं। इन व्यवस्थाओं में कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की सुविधा और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

निरीक्षण के दौरान इन खामियों का सामने आना स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारियों पर भी सवाल खड़े करता है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ उनके लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता होनी चाहिए।

 आंगनबाड़ी केंद्र में RO बंद मिलने पर भी सवाल

निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र का RO भी बंद मिला। पेयजल जैसी आवश्यक सुविधा का बंद होना बच्चों की सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से गंभीर विषय है। ऐसे में संबंधित केंद्रों पर उपलब्ध संसाधनों को चालू हालत में रखना और उनकी नियमित निगरानी करना जरूरी है।

जिलाधिकारी के निरीक्षण ने स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र में बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव की स्थिति को सामने रखा। अब संबंधित व्यवस्थाओं में सुधार और कमियों को दूर करने के लिए की जाने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

 DM का सख्त संदेश—लापरवाही बर्दाश्त नहीं

जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के मामले में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया। उनका संदेश स्पष्ट है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ पेयजल और उपयोग योग्य शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए।

औचक निरीक्षण का मकसद सरकारी संस्थानों में जिम्मेदारी तय करना और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है। अब देखना होगा कि निरीक्षण में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कितनी तेजी से सुधार किया जाता है।

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