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अमेरिका में हिंदू मंदिर पर सामूहिक गोलीबारी की साजिश से हड़कंप, भारत ने जताई कड़ी चिंता; आरोपी 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार

**इलिनॉय के ऑरोरा में मंदिर को निशाना बनाने की कथित योजना का मामला आया सामने, जांच में नफरती पत्र और हथियारों से जुड़ी सामग्री मिलने का दावा; भारत ने अमेरिकी प्रशासन से भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की**

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Deepika

8 मिनट नई दिल्ली

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अमेरिका में हिंदू मंदिर पर सामूहिक गोलीबारी की साजिश से हड़कंप, भारत ने जताई कड़ी चिंता; आरोपी 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार

**नई दिल्ली।** अमेरिका के इलिनॉय राज्य में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर गोलीबारी करने की कथित साजिश का मामला सामने आने के बाद भारत ने गहरी चिंता जताई है। अमेरिका के ऑरोरा इलाके में स्थित मंदिर को निशाना बनाने की योजना से जुड़े इस मामले ने वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को चिंताजनक बताते हुए कहा है कि साजिश के पीछे कथित तौर पर सामने आई नस्लवादी, नफरत फैलाने वाली और भारत विरोधी मानसिकता बेहद परेशान करने वाली है। भारत ने अमेरिकी प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इलिनॉय के ऑरोरा क्षेत्र में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर गोलीबारी की साजिश रचे जाने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में हिंदू धर्म और भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ जिस तरह की कथित नस्लवादी सोच सामने आई है, वह गंभीर चिंता का विषय है। भारत का मानना है कि किसी धार्मिक स्थल को निशाना बनाने की योजना केवल वहां के श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी विश्वास से भी जुड़ा मामला है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नफरत और नस्ली भेदभाव से प्रेरित हिंसा को किसी भी परिस्थिति में सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

## 19 वर्षीय युवक पर मंदिर को निशाना बनाने की साजिश का आरोप

इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों ने पैलेटाइन इलाके के रहने वाले 19 वर्षीय युवक अलेक्जेंड्रोस पापोरकिस को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपी पर इलिनॉय के ऑरोरा क्षेत्र में स्थित हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर गोलीबारी की योजना बनाने का आरोप है। जांच के दौरान उसके पास से एक कथित नफरती पत्र बरामद होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि पत्र में व्हाइट सुप्रीमेसी यानी श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा से जुड़ी बातें और भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा फैलाने से संबंधित सामग्री शामिल थी। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और बरामद सामग्री की वास्तविक स्थिति का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

अमेरिका में इस तरह की कथित साजिश का सामने आना इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि धार्मिक स्थलों पर हमले की धमकियां और नस्लीय नफरत से प्रेरित हिंसा किसी एक व्यक्ति तक सीमित खतरा नहीं पैदा करतीं। इससे पूरे समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। हिंदू मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी मंदिर को निशाना बनाने की योजना बनाई जाती है, तो संभावित खतरे की गंभीरता और बढ़ जाती है। इसी वजह से मामले की जांच कर रहे अधिकारियों के लिए कथित योजना, आरोपी की मंशा और उससे जुड़े अन्य संभावित पहलुओं की पड़ताल करना महत्वपूर्ण है।

## सूचना मिलने के बाद शुरू हुई पुलिस की जांच

मामले की जांच उस समय शुरू हुई, जब एक व्यक्ति ने पुलिस को आरोपी की कथित योजना के बारे में जानकारी दी। बताया गया है कि आरोपी पैलेटाइन इलाके में स्थित टैको बेल रेस्टोरेंट में कैशियर के रूप में काम करता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने शिकायत करने वाले व्यक्ति के साथ कथित सामूहिक गोलीबारी की योजना से जुड़ा एक नक्शा साझा किया था। इस सामग्री में राइफल, मैगजीन, बॉडी आर्मर और अन्य सैन्य उपकरणों की तस्वीरें भी शामिल होने की बात कही गई है। इन जानकारियों के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।

जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर अपने साथ काम करने वाले कर्मचारियों से कहा था कि आने वाला रविवार बेहद खास होने वाला है। इस बयान को लेकर भी जांचकर्ताओं ने परिस्थितियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की। पुलिस को कथित योजना की जानकारी देने वाले व्यक्ति की सूचना इस मामले में अहम मानी जा रही है, क्योंकि समय रहते सूचना मिलने से संभावित खतरे का आकलन करने और आवश्यक कदम उठाने का अवसर मिला। हालांकि, आरोपी ने वास्तव में किस स्तर तक तैयारी की थी, उसके पास कौन-कौन से हथियार उपलब्ध थे और कथित योजना को अमल में लाने की स्थिति क्या थी, इन सभी सवालों के जवाब जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होंगे।

## बंदूक फंसने और मौके से निकलने को लेकर भी जांच

मामले से जुड़ी एक अन्य जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह आरोपी ने अपने एक सहकर्मी को फोन किया था। पुलिस के हवाले से सामने आई जानकारी में दावा किया गया है कि आरोपी ने फोन पर बताया कि उसकी बंदूक फंस गई थी, जिसके बाद वह बिना किसी की नजर में आए तेजी से वहां से निकल आया। इस कथित बातचीत ने जांच के दायरे को और व्यापक बना दिया है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि आरोपी किस स्थान पर था, उसके पास किस प्रकार का हथियार था और कथित योजना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।

इस मामले में हथियारों से जुड़ी सामग्री, कथित नफरती पत्र, शिकायतकर्ता की ओर से दी गई जानकारी और सहकर्मियों के बयान जैसे पहलुओं का महत्व बढ़ गया है। जांच एजेंसियों के लिए यह भी जरूरी है कि वे इन सभी तथ्यों के बीच संबंध स्थापित करें और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि करें। फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही परखा जाएगा। गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है, इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले और जांच में सामने आने वाले प्रमाणों के आधार पर ही निकाला जाएगा।

## भारत ने अमेरिकी प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग

भारत सरकार ने इस मामले को केवल स्थानीय कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटना के रूप में नहीं, बल्कि अमेरिका में भारतीय समुदाय की सुरक्षा से संबंधित गंभीर मुद्दे के तौर पर देखा है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रशासन से अपील की है कि मामले की गहराई से जांच की जाए, यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो जिम्मेदार लोगों को कानून के मुताबिक सख्त सजा दिलाई जाए और भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

भारत की चिंता का एक महत्वपूर्ण पहलू अमेरिका में रहने वाले भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के समुदाय के खिलाफ कथित नस्लीय नफरत है। भारतीय समुदाय अमेरिका के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और पेशेवर जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग वहां रहते हैं और अपने धार्मिक तथा सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेते हैं। ऐसे में किसी मंदिर को निशाना बनाने की कथित योजना समुदाय के भीतर स्वाभाविक रूप से चिंता पैदा कर सकती है। भारत चाहता है कि अमेरिकी अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

## नस्लवाद और धार्मिक नफरत पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर नस्लीय भेदभाव, धार्मिक असहिष्णुता और कट्टरपंथी विचारधाराओं से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है। व्हाइट सुप्रीमेसी जैसी विचारधाराएं नस्ल के आधार पर लोगों को श्रेष्ठ या कमतर मानने की सोच को बढ़ावा देती हैं। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच में इस तरह की विचारधारा से प्रेरित हिंसक योजना के प्रमाण मिलते हैं, तो मामला केवल व्यक्तिगत अपराध तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि समाज में नफरत फैलाने वाली मानसिकता की गंभीरता भी सामने आती है।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए महत्वपूर्ण है। मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे और अन्य धार्मिक स्थल लोगों को पूजा-अर्चना के साथ-साथ सामुदायिक जुड़ाव का अवसर देते हैं। ऐसे स्थानों पर हिंसा की आशंका पैदा होना लोगों के धार्मिक अधिकारों और स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। इसीलिए ऐसे मामलों में समय पर सूचना देना, पुलिस की त्वरित कार्रवाई, संभावित खतरे का आकलन और समुदायों के बीच विश्वास बनाए रखना बेहद आवश्यक होता है।

## भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर टिकी नजरें

ऑरोरा में हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की कथित साजिश का मामला सामने आने के बाद अब जांच के परिणामों पर नजर रहेगी। यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी की योजना कितनी आगे बढ़ चुकी थी, क्या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े थे और क्या किसी वास्तविक हमले की तैयारी की जा रही थी। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि कथित नफरती पत्र और अन्य सामग्री का आरोपी की योजना से क्या संबंध था।

भारत ने इस मामले पर चिंता जताकर स्पष्ट संदेश दिया है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा उसके लिए महत्वपूर्ण विषय है। अमेरिकी प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कराए, दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करे और धार्मिक स्थलों तथा भारतीय समुदाय की सुरक्षा को मजबूत बनाए।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कथित साजिश से जुड़े आरोपों की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पूरी हो। साथ ही, नस्लीय नफरत और धार्मिक हिंसा को बढ़ावा देने वाली किसी भी गतिविधि के खिलाफ कानून के दायरे में प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों के बीच सुरक्षा और विश्वास का माहौल बना रहे।

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