धनतेरस आज 6 नवंबर को! लखनऊ में शाम 5:50 से 7:47 बजे तक शुभ मुहूर्त, जानें सोना-चांदी खरीदने और कुबेर पूजा का सही समय
देशभर में आज 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को धनतेरस का पावन त्योहार मनाया जा रहा है। दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन और नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आती हैं।
धनतेरस पर पूजा और खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है। इस बार प्रदोष काल में पूजा का विशेष समय रखा गया है। हालांकि अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण पूजा का मुहूर्त भी अलग-अलग है। आइए जानते हैं धनतेरस 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, शहरवार पूजा का समय और पूजा करने की पूरी विधि।
धनतेरस 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है।
धनतेरस की तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
प्रदोष काल: शाम के समय
पूजा का प्रमुख शुभ समय: शहर के अनुसार अलग-अलग
धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान कुबेर, माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा करना शुभ माना जाता है।
लखनऊ, दिल्ली और यूपी के शहरों में धनतेरस पूजा का मुहूर्त
धनतेरस पर पूजा करने से पहले अपने शहर का शुभ समय जानना जरूरी है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख शहरों में पूजा और खरीदारी का समय इस प्रकार है।
शहर
शुभ मुहूर्त
लखनऊ
शाम 5:50 से 7:47 बजे
दिल्ली-NCR
शाम 6:02 से 7:57 बजे
कानपुर
शाम 5:54 से 7:50 बजे
वाराणसी
शाम 5:44 से 7:42 बजे
प्रयागराज
शाम 5:48 से 7:45 बजे
अयोध्या
शाम 5:46 से 7:43 बजे
गोरखपुर
शाम 5:41 से 7:38 बजे
आगरा
शाम 6:02 से 7:58 बजे
मेरठ
शाम 6:00 से 7:56 बजे
पटना
शाम 5:36 से 7:33 बजे
जयपुर
शाम 6:11 से 8:07 बजे
मुंबई
शाम 6:35 से 8:35 बजे
कोलकाता
शाम 5:28 से 7:26 बजे
भोपाल
शाम 6:10 से 8:08 बजे
इंदौर
शाम 6:17 से 8:16 बजे
चंडीगढ़
शाम 6:00 से 7:54 बजे
देहरादून
शाम 5:56 से 7:51 बजे
अहमदाबाद
शाम 6:30 से 8:28 बजे
बेंगलुरु
शाम 6:25 से 8:20 बजे
चेन्नई
शाम 6:14 से 8:10 बजे
हैदराबाद
शाम 6:15 से 8:13 बजे
पुणे
शाम 6:32 से 8:31 बजे
नागपुर
शाम 6:08 से 8:07 बजे
रायपुर
शाम 5:58 से 7:57 बजे
जोधपुर
शाम 6:24 से 8:20 बजे
उदयपुर
शाम 6:24 से 8:21 बजे
रांची
शाम 5:39 से 7:38 बजे
भुवनेश्वर
शाम 5:42 से 7:42 बजे
गुवाहाटी
शाम 5:08 से 7:05 बजे
ध्यान दें कि ये समय पूजा और खरीदारी के लिए प्रकाशित शहरवार मुहूर्त हैं। अलग-अलग पंचांगों में गणना के आधार पर कुछ अंतर हो सकता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
धनतेरस के दिन लोग अपनी क्षमता के अनुसार अलग-अलग वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन चीजों को खरीदना शुभ माना जाता है।
1. सोना और चांदी: धनतेरस पर सोने और चांदी के आभूषण या सिक्के खरीदने की परंपरा है। इन्हें समृद्धि और आर्थिक खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
2. बर्तन: इस दिन पीतल, तांबा और स्टील के बर्तन खरीदने की भी परंपरा है। कई लोग नए बर्तनों में अनाज या चावल भरकर घर लाते हैं।
3. झाड़ू: धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी मान्यता है। इसे घर की सफाई और दरिद्रता दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
4. इलेक्ट्रॉनिक सामान: आजकल लोग धनतेरस पर टीवी, फ्रिज, मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भी खरीदते हैं।
5. वाहन और संपत्ति: कई लोग इस शुभ अवसर पर दोपहिया, चारपहिया वाहन और अन्य संपत्तियों की खरीदारी भी करते हैं।
धनतेरस पर कैसे करें भगवान कुबेर और धन्वंतरि की पूजा?
धनतेरस की शाम पूजा करने के लिए सबसे पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा स्थल को साफ करके वहां भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
पूजा की विधि इस प्रकार है:
सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
पूजा स्थल पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
भगवान धन्वंतरि और कुबेर देवता का ध्यान करें।
सभी देवी-देवताओं को फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
घी का दीपक जलाकर धूप और अगरबत्ती दिखाएं।
भगवान धन्वंतरि से परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
माता लक्ष्मी और कुबेर देवता से सुख-समृद्धि और धन-धान्य का आशीर्वाद मांगें।
अंत में सभी देवी-देवताओं की आरती करें।
धनतेरस पर क्यों जलाया जाता है यमदीप?
धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपक जलाने की विशेष परंपरा है। इसे यमदीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
इसके लिए चौमुखा दीपक तैयार किया जाता है। इसमें सरसों या तिल का तेल डालकर चार बत्तियां लगाई जाती हैं। दीपक के नीचे कुछ अक्षत रखे जाते हैं। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाया जाता है और यमराज से परिवार की लंबी उम्र तथा अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है।
भगवान धन्वंतरि की पूजा का क्या है महत्व?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है।
इसी वजह से धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। माना जाता है कि उनकी आराधना करने से परिवार में आरोग्य, सुख और अच्छी सेहत बनी रहती है।
धनतेरस पर क्या है सबसे खास?
धनतेरस केवल सोना-चांदी खरीदने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली की कामना का पर्व भी है। इस दिन भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य, माता लक्ष्मी से धन और भगवान कुबेर से आर्थिक स्थिरता की प्रार्थना की जाती है।
इसलिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी करें और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करें। त्योहार का वास्तविक महत्व परिवार के साथ खुशियां बांटने, घर में सकारात्मकता लाने और जरूरतमंदों की मदद करने में भी है।