शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
लोकतंत्र लाइव टीवी लोगो
ब्रेकिंग

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार! 12 घंटे में 3 हजार शिकायतें, अनिल विज ने बातचीत के लिए बुलाया

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से बिजली सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। महज 12 घंटे में करीब 3 हजार बिजली संबंधी शिकायतें दर्ज की गईं। स्थिति को देखते हुए बिजली मंत्री अनिल विज ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया और उनसे हड़ताल समाप्त करने की अपील की।

Pawan Kumar

• रिपोर्टर व न्यूज़ संपादक

6 मिनट हरियाणा

शेयर करें:
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार! 12 घंटे में 3 हजार शिकायतें, अनिल विज ने बातचीत के लिए बुलाया

चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो गई है। शुक्रवार को भी कर्मचारियों का आंदोलन जारी रहने से गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, करनाल और अंबाला समेत कई क्षेत्रों में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली संकट का असर घरों, जलापूर्ति और औद्योगिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। कई जगह बिजली आपूर्ति बाधित होने से नाराज स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। इस बीच हरियाणा सरकार ने हड़ताल पर गए कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया है। प्रदेश के बिजली मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए तैयार है। इसमें इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई करने का विकल्प भी शामिल है। वहीं, कर्मचारी यूनियनों ने निजीकरण के फैसले और अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनी, तो तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल को अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदला जा सकता है।

 बिजली मंत्री अनिल विज की कर्मचारियों से अपील, बोले- बातचीत के लिए तैयार सरकार

हरियाणा में बिजली संकट के बीच बिजली मंत्री अनिल विज ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से आंदोलन समाप्त कर ड्यूटी पर लौटने की अपील की है। उन्होंने एक्स पर अपने संदेश में कहा कि कर्मचारी हड़ताल खत्म करके काम पर आएं। सरकार सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए तैयार है। मंत्री ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई के विकल्प का भी उल्लेख किया। सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब प्रदेश के कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जलापूर्ति और औद्योगिक कामकाज पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सरकार के सामने बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करने की चुनौती है। अब देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।

 गुरुग्राम में बिजली संकट, महज 12 घंटे में आईं 3 हजार से ज्यादा शिकायतें

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर गुरुग्राम में भी व्यापक रूप से देखने को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 10 बजे से शहर के अलग-अलग हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आने लगीं। हड़ताल शुरू होने के बाद महज 12 घंटे के भीतर बिजली निगम को 3 हजार से ज्यादा शिकायतें मिलीं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रात के दौरान बिजली निगम को 945 शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि सुबह के केवल दो घंटों में 2,245 शिकायतें दर्ज की गईं। इसके बाद भी ऑनलाइन माध्यमों और कॉल सेंटर के जरिए शिकायतें आने का सिलसिला जारी रहा। बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को घरेलू कामकाज, पानी की उपलब्धता और अन्य जरूरी सेवाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिजली संकट के विरोध में कई स्थानों पर लोगों ने प्रदर्शन भी किया। शिकायतों की बढ़ती संख्या ने हड़ताल के दौरान बिजली व्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को उजागर किया है।

 निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का आंदोलन

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का प्रमुख कारण बिजली वितरण व्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर विरोध बताया जा रहा है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के एक फैसले में 'इलेवन पावर' को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने का मामला शामिल है। बिजली मंत्री अनिल विज पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य सरकार इस फैसले को अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) में चुनौती देगी और इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग करेगी। वहीं, बिजली कर्मचारी संगठनों का कहना है कि निजी वितरक को समानांतर लाइसेंस दिए जाने से राज्य सरकार के स्वामित्व वाले दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) की स्थिति कमजोर हो सकती है। कर्मचारियों को आशंका है कि इस फैसले का असर भविष्य में बिजली निगम की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के हितों पर पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारी यूनियनें निजीकरण के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं।

 कर्मचारियों का आरोप- सरकार ने नहीं मानी मांगें

बिजली निगम कर्मचारी यूनियनों के पदाधिकारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ठोस समाधान नहीं मिला। यूनियन नेताओं के मुताबिक, पहले आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन रोक दिया जाता था, लेकिन इस बार कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांग बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण से जुड़े फैसले को वापस लेना और लंबित मांगों पर सहमति बनाना है। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल के दौरान सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत नहीं की, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है। हालांकि, हड़ताल की अवधि बढ़ाने को लेकर अंतिम फैसला कर्मचारी संगठनों की आगे की रणनीति पर निर्भर करेगा।

 फॉल्ट ठीक नहीं करने के फैसले से बढ़ सकती है परेशानी

हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारणों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने कहा है कि वे अपने स्तर पर बिजली सप्लाई बंद नहीं कर रहे हैं, बल्कि आंदोलन के दौरान फॉल्ट ठीक करने का काम भी नहीं कर रहे हैं। यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, बिजली लाइनों में खराबी आने पर उसे ठीक करने के लिए कर्मचारी नहीं जाएंगे। उन्होंने आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी लाइनों में खराबी आने पर भी मरम्मत के लिए नहीं जाने की बात कही है। इस रुख से बिजली आपूर्ति बहाल करने में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बिजली व्यवस्था में किसी भी तकनीकी खराबी को समय पर ठीक करना जरूरी होता है, क्योंकि लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने से घरों, अस्पतालों, जलापूर्ति और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में हड़ताल के दौरान बिजली व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।

 बातचीत से समाधान निकलेगा या बढ़ेगा बिजली संकट?

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जारी विवाद को गंभीर मोड़ पर ला दिया है। एक तरफ बिजली मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों को बातचीत के लिए आमंत्रित करते हुए हड़ताल समाप्त करने की अपील की है, तो दूसरी तरफ कर्मचारी यूनियनें निजीकरण के फैसले को वापस लेने और लंबित मांगों को पूरा करने पर जोर दे रही हैं। गुरुग्राम में 12 घंटे के भीतर 3 हजार से अधिक शिकायतें मिलने और कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से आम जनता की परेशानी बढ़ गई है। अब सबकी निगाहें सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो बिजली आपूर्ति सामान्य करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है। वहीं, बातचीत बेनतीजा रहने और हड़ताल लंबी खिंचने की स्थिति में प्रदेश के कई क्षेत्रों में बिजली संकट और गहरा सकता है।

शेयर करें:

ये भी पढ़ें

और देखें →