लखनऊ EOW की कार्रवाई, वी-केयर कंपनी पर पोंजी स्कीम चलाकर लोगों को फंसाने का आरोप; मामले में दर्ज हैं 26 मुकदमे
लखनऊ, 21 अक्टूबर 2026। बीमा पॉलिसियों के नाम पर आकर्षक लाभ का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी करने के मामले में उत्तर प्रदेश की आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) की टीम को बड़ी सफलता मिली है। ईओडब्ल्यू ने वी-केयर कंपनी की डायरेक्टर एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मधुमिता कौर को झारखंड की राजधानी रांची से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई लखनऊ के कृष्णानगर थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मामले से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, कंपनी पर लोगों को बीमा पॉलिसी कराने के लिए प्रोत्साहित कर उनकी निवेशित धनराशि और कमीशन का कथित गबन करने का आरोप है। इस प्रकरण में विभिन्न थानों में कुल 26 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
रांची से गिरफ्तार कर लखनऊ लाई गईं आरोपी
ईओडब्ल्यू उत्तर प्रदेश की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, अन्वेषण संख्या 1/16 से संबंधित मु0अ0सं0 349/12, थाना कृष्णानगर, जनपद लखनऊ के मामले में वांछित अभियुक्ता मधुमिता कौर को 18 अक्टूबर 2026 को झारखंड के रांची जनपद स्थित अरगोड़ा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। मधुमिता कौर, गुरजीत कौर की पत्नी हैं और उनका पता 486/G, पी.पी. कंपाउंड, गिंदपिरी, रांची, झारखंड बताया गया है। वह वी-केयर कंपनी में डायरेक्टर और CEO के पद पर कार्यरत थीं।
प्रेस नोट के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद 19 अक्टूबर 2026 को रांची की सक्षम अदालत से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया गया। इसके बाद आरोपी को लखनऊ लाया गया और लखनऊ स्थित न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की गई है।
बीमा पॉलिसियों पर आकर्षक लाभ का दिया जाता था लालच
जांच एजेंसी के मुताबिक, वी-केयर मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का पंजीकरण वर्ष 2008-09 में दिल्ली और हरियाणा में हुआ था। कंपनी ने लखनऊ के कृष्णानगर क्षेत्र में अपना क्षेत्रीय कार्यालय खोला था। आरोप है कि कंपनी ने लोगों को रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस और एगॉन लाइफ इंश्योरेंस जैसी कंपनियों की बीमा पॉलिसियां खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया। ग्राहकों को पॉलिसियों के जरिए आकर्षक लाभ मिलने का भरोसा दिलाया गया।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस प्रक्रिया में लोगों से बीमा पॉलिसियां कराई गईं और उन्हें निवेश की गई रकम पर लाभ मिलने की उम्मीद दिखाई गई। हालांकि, बाद में कंपनी पर ग्राहकों की धनराशि का कथित गबन करने और कार्यालय बंद कर फरार हो जाने का आरोप लगा। जांच एजेंसी इस मामले में कंपनी से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
दूसरे साल का प्रीमियम भरने का दिया जाता था आश्वासन
प्रेस नोट में कंपनी की कथित योजना का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति अपने संपर्क में आने वाले अन्य लोगों को बीमा कराने के लिए प्रोत्साहित करता था या उनकी बीमा पॉलिसी करवाता था, तो कंपनी की ओर से दूसरे वर्ष की प्रीमियम किस्त जमा करने का आश्वासन दिया जाता था।
आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए अधिक से अधिक लोगों को कंपनी की योजना से जोड़ा गया और उनसे बीमा पॉलिसियां कराई गईं। शुरुआत में दूसरे वर्ष का प्रीमियम जमा करने का भरोसा दिया गया, लेकिन बाद में कंपनी की ओर से निर्धारित प्रीमियम किस्त जमा नहीं की गई। इससे पॉलिसीधारकों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हुई और उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित योजना के माध्यम से लोगों को लाभ का लालच देकर जोड़ा गया। बाद में निवेश की गई रकम और कमीशन का गबन किए जाने का आरोप सामने आया। कंपनी के संचालकों और संबंधित व्यक्तियों के फरार होने के बाद मामला आर्थिक अपराध की जांच के दायरे में आया।
पोंजी स्कीम के जरिए ठगी का आरोप, 26 मुकदमे दर्ज
ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस मामले में पोंजी स्कीम के माध्यम से लोगों को आकर्षित कर धनराशि जुटाने और कथित तौर पर गबन करने का आरोप है। प्रकरण में करोड़ों रुपये की रकम के गबन की बात सामने आई है। कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न थानों में कुल 26 अभियोग पंजीकृत होने की जानकारी प्रेस नोट में दी गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन जांच कर रहा है। मधुमिता कौर की गिरफ्तारी को इस प्रकरण में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। अब जांच के दौरान कंपनी की कथित योजना, धनराशि के लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका से जुड़े पहलुओं पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
ध्यान देने वाली बात: कंपनी और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।