कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों ने चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली 10 नवंबर के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया है।
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित विशाल रैली को लेकर राजधानी के व्यापारियों ने चिंता जताई है। व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि नवंबर के पहले सप्ताह में धनतेरस और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के चलते दिल्ली के बाजारों में कारोबार चरम पर रहता है। ऐसे में रैली के कारण यातायात में बदलाव, रास्तों पर बैरिकेडिंग और भीड़ की आशंका से व्यापार प्रभावित हो सकता है। CTI ने कांग्रेस नेता से रैली को 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित करने पर विचार करने की अपील की है।
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को भेजे पत्र में कहा कि संगठन को जानकारी मिली है कि कांग्रेस पार्टी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली आयोजित करने जा रही है। उन्होंने अनुरोध किया कि त्योहारों के व्यस्त कारोबारी सीजन को देखते हुए रैली की तारीख 10 नवंबर के बाद रखी जाए।
पत्र में बृजेश गोयल ने बताया कि धनतेरस और दीपावली से पहले दिल्ली के बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से व्यापारी, कारोबारी और ग्राहक खरीदारी के लिए राजधानी पहुंचते हैं। ऐसे समय में किसी बड़े आयोजन के कारण यातायात प्रभावित होने से बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, जिसका असर दुकानदारों और ग्राहकों दोनों पर पड़ने की आशंका है।
CTI ने स्पष्ट किया कि संगठन लोकतांत्रिक मूल्यों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करता है। हालांकि, उसका कहना है कि त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों को रैली की तारीख और स्थान तय करते समय बाजारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव पर भी विचार करना चाहिए।
धनतेरस पर 25 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान
बृजेश गोयल ने अपने पत्र में दिल्ली के बाजारों में धनतेरस के दौरान होने वाले बड़े कारोबार का उल्लेख किया। CTI के मुताबिक, धनतेरस पर राजधानी में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है। संगठन का कहना है कि इस कारोबार में सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, ड्राई फ्रूट्स, मिठाइयां, ऑटोमोबाइल, वाहन, प्रॉपर्टी और उपहारों से जुड़े बाजारों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
पत्र में बताया गया कि इस साल धनतेरस 6 नवंबर, दीपावली 8 नवंबर और भैया दूज 10 नवंबर को है। त्योहारों की खरीदारी आम तौर पर मुख्य पर्व से कई दिन पहले शुरू हो जाती है। ऐसे में नवंबर के शुरुआती दिनों को कारोबारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CTI का तर्क है कि दिल्ली के बाजार केवल स्थानीय ग्राहकों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि यहां से बड़ी मात्रा में सामान देश के दूसरे राज्यों में भी भेजा जाता है। इसलिए बाजारों तक पहुंच में किसी तरह की बाधा का असर खुदरा दुकानदारों के साथ-साथ थोक व्यापारियों, परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
लगातार प्रदर्शनों के कारण 3 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
CTI ने पत्र में दिल्ली में हाल के दिनों में हुए प्रदर्शनों, मार्च और यातायात प्रतिबंधों का भी जिक्र किया है। संगठन के मुताबिक, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और मध्य दिल्ली के अन्य इलाकों में लगातार होने वाले आयोजनों और रास्ते बंद रहने से व्यापारियों को पहले ही लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
CTI का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण थोक बाजारों में बाहर से माल पहुंचने में बाधा आई और खुदरा बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। हालांकि, यह नुकसान संगठन की ओर से किया गया दावा है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए अलग से आंकड़ों की आवश्यकता होगी।
व्यापारियों की चिंता यह है कि त्योहारों के महत्वपूर्ण कारोबारी दौर में यदि फिर बड़े पैमाने पर यातायात प्रभावित होता है, तो दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच कम हो सकती है। इससे पहले से प्रभावित कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।
रामलीला मैदान के आसपास कई प्रमुख थोक और खुदरा बाजार
CTI ने अपने पत्र में रामलीला मैदान के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों का भी उल्लेख किया है। संगठन के मुताबिक, मैदान के लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के कई ऐतिहासिक और बड़े थोक एवं खुदरा बाजार आते हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, मोरी गेट, किनारी बाजार, दरीबा, दरियागंज, अजमेरी गेट, जामा मस्जिद, झंडेवालान, करोल बाग, नबी करीम, आजाद मार्केट और लाजपत राय मार्केट जैसे बाजार शामिल हैं।
ये बाजार कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, मसालों, बर्तनों, आभूषणों और अन्य वस्तुओं के थोक एवं खुदरा कारोबार के लिए जाने जाते हैं। यहां से दिल्ली के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में भी सामान की आपूर्ति होती है।
CTI की आशंका है कि रैली के दौरान संभावित ट्रैफिक डायवर्जन, बैरिकेडिंग और भीड़ के कारण इन बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। यदि ग्राहकों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर त्योहारों की खरीदारी और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
रेलवे स्टेशनों तक पहुंच को लेकर भी चिंता
व्यापारियों के संगठन ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का भी जिक्र किया है। इन दोनों स्टेशनों के जरिए बड़ी संख्या में यात्री, व्यापारी और खरीदार दिल्ली आते-जाते हैं। CTI का कहना है कि रैली के दौरान यदि आसपास के मार्गों पर यातायात प्रतिबंध लगाए जाते हैं या भीड़ बढ़ती है, तो बाहर से आने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।
संगठन को आशंका है कि यातायात संबंधी अनिश्चितता के कारण कुछ खरीदार दिल्ली आने की योजना टाल सकते हैं। त्योहारों से पहले दिल्ली के थोक बाजारों में खरीदारी करने वाले कारोबारियों और ग्राहकों की संख्या बढ़ने के कारण ऐसी स्थिति व्यापार को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि, रैली के दौरान किन मार्गों पर प्रतिबंध लगेंगे, ट्रैफिक डायवर्जन कितना व्यापक होगा या मेट्रो सेवाओं पर कोई असर पड़ेगा या नहीं, इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित प्रशासन की व्यवस्था और आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगी।
व्यापारियों की अपील—10 नवंबर के बाद हो रैली
CTI ने राहुल गांधी से दोबारा आग्रह किया है कि 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने पर विचार किया जाए। संगठन का कहना है कि वह राजनीतिक दलों के शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक गतिविधियों के अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन धनतेरस, दीपावली और भैया दूज तक दिल्ली के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में बड़ी रैलियों से बचना व्यापारियों के हित में होगा।
पत्र में CTI ने उम्मीद जताई कि कांग्रेस नेतृत्व कारोबारियों की चिंताओं को समझेगा और रैली की तारीख तय करते समय त्योहारों के कारोबारी महत्व को ध्यान में रखेगा।
फिलहाल, CTI की ओर से रैली स्थगित करने का अनुरोध किया गया है। रैली की तारीख में बदलाव होगा या कार्यक्रम पूर्व निर्धारित समय पर आयोजित किया जाएगा, इस पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया और आगे के फैसले का इंतजार रहेगा।