राजस्थान के डूंगरपुर में पुलिस ने नकली भारतीय नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
डूंगरपुर: राजस्थान के डूंगरपुर में नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने वाले कथित अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, मशहूर वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित होकर कुछ युवाओं ने जाली नोट बनाने का काम शुरू किया और धीरे-धीरे इसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैल गया। डूंगरपुर पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ ‘ऑपरेशन नोटफ्लिक्स’ चलाते हुए मास्टरमाइंड समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ तक आरोपियों के संपर्क सामने आने की बात कही गई है। पुलिस ने इस कार्रवाई को नकली नोटों के कारोबार के खिलाफ बड़ी सफलता बताया है। फिलहाल, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने कितनी जाली मुद्रा तैयार की, उसे कहां-कहां इस्तेमाल किया गया और इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हैं।
‘ऑपरेशन नोटफ्लिक्स’ के तहत पुलिस की कार्रवाई
डूंगरपुर पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में कथित नकली नोट गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्यों ने वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित होकर जाली नोट तैयार करने का विचार विकसित किया था। इसके बाद डिजिटल फाइलों और विशेष कागजों की मदद से नकली मुद्रा तैयार करने का प्रयास किया गया।
पुलिस के मुताबिक, इस काम के लिए ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा था। कागज की आपूर्ति और नोटों से संबंधित डिजिटल फाइलें हासिल करने के लिए अलग-अलग लोगों से संपर्क किया गया। जांच में सामने आए इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की और विभिन्न राज्यों में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इस मामले में पुलिस की साइबर सेल और विशेष टीम ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों के संपर्कों और गतिविधियों का पता लगाने में भूमिका निभाई।
माडा स्कूल ग्राउंड से पकड़े गए थे दो आरोपी
इस पूरे मामले की शुरुआत 29 सितंबर को हुई, जब डूंगरपुर के माडा स्कूल ग्राउंड से पुलिस ने भावेश खटीक और नयन जोशी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, दोनों के पास से 4 लाख 95 हजार 500 रुपये की जाली मुद्रा बरामद की गई थी।
इस बरामदगी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ शुरू की। पूछताछ और आगे की जांच के दौरान कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आए। पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि नकली नोट कहां तैयार किए जा रहे थे, उन्हें तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री कौन उपलब्ध करा रहा था और तैयार मुद्रा को बाजार तक पहुंचाने में किसकी भूमिका थी।
पुलिस के अनुसार, शुरुआती गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और दूसरे राज्यों में सक्रिय संदिग्धों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली गई।
लुधियाना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार हुआ कथित मास्टरमाइंड
जांच के दौरान मुख्य आरोपी रवि कुमार मिश्रा का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक, डूंगरपुर में कार्रवाई की भनक लगने के बाद वह फरार हो गया था। बताया गया कि वह लगातार अपने ठिकाने और मोबाइल नंबर बदल रहा था, जिससे उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
इसके बाद डूंगरपुर साइबर सेल और विशेष टीम ने तकनीकी जानकारी के आधार पर उसकी तलाश जारी रखी। पुलिस के अनुसार, करीब 1,300 किलोमीटर दूर पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से रवि कुमार मिश्रा को गिरफ्तार किया गया।
इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों की जांच तेज कर दी। जांचकर्ताओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि रवि की भूमिका केवल नोट तैयार करने तक सीमित थी या वह सामग्री जुटाने, डिजिटल फाइलें हासिल करने और जाली मुद्रा को अलग-अलग जगहों तक पहुंचाने की गतिविधियों में भी शामिल था।
हरियाणा के युवक ने सुझाया था नकली नोट बनाने का तरीका
पुलिस जांच में हरियाणा के अंबाला निवासी आनंद राजपूत की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, आनंद ने वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित होकर नकली नोट छापने का विचार विकसित किया था। बताया गया कि इस काम के लिए फोटोशॉप और यूट्यूब की मदद ली गई, जबकि जरूरी कागज की व्यवस्था ऑनलाइन माध्यमों से की जाती थी।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कथित तौर पर तैयार की गई डिजिटल फाइलें किस तरह साझा की जाती थीं और गिरोह के सदस्य उनके जरिए किस प्रकार जाली मुद्रा तैयार कर रहे थे। जांच में डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन संपर्कों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वेब सीरीज से प्रेरित होने की बात पुलिस जांच में सामने आए कथित तथ्यों पर आधारित है। किसी भी आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।
टेलीग्राम चैनल के जरिए कागज और डिजिटल फाइलें जुटाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में सामग्री उपलब्ध कराने वाले लोगों की भी भूमिका सामने आई है। टेलीग्राम पर ‘अंकित पेपर सेलर’ नाम के चैनल के जरिए कागज उपलब्ध कराने के आरोपी मोहम्मद आरिफ को उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार किया गया।
वहीं, पांच सौ रुपये के नोट से संबंधित डिजिटल फाइल उपलब्ध कराने के आरोपी तरुण मालेकर को छत्तीसगढ़ के दुर्ग से पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि इन संपर्कों की मदद से गिरोह के सदस्यों को नकली नोट तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री और डिजिटल संसाधन उपलब्ध हो रहे थे।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन सामग्रियों और फाइलों की आपूर्ति कितने समय से चल रही थी, इनके बदले धन का लेनदेन कैसे किया जाता था और क्या इस काम में अन्य ऑनलाइन चैनलों या व्यक्तियों का भी इस्तेमाल किया गया।
राजस्थान से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ तक फैला नेटवर्क
डूंगरपुर पुलिस के अनुसार, मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी 25 वर्षीय रवि कुमार मिश्रा, हरियाणा के अंबाला कैंट निवासी 20 वर्षीय आनंद राजपूत, कानपुर निवासी मोहम्मद आरिफ, छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी 27 वर्षीय तरुण मालेकर और डूंगरपुर निवासी 23 वर्षीय भावेश खटीक तथा 19 वर्षीय नयन जोशी शामिल हैं।
पुलिस ने इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ में कार्रवाई की। अलग-अलग राज्यों में गिरफ्तारियां होने से जांचकर्ताओं को कथित नेटवर्क के व्यापक संपर्कों की जानकारी मिली है।
हालांकि, गिरोह ने कुल कितनी जाली मुद्रा तैयार की और उसमें से कितनी बाजार में पहुंची, इसका पूरा ब्योरा अभी सामने आना बाकी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि नकली नोटों का इस्तेमाल किन स्थानों पर किया गया और क्या इनके जरिए किसी अन्य व्यक्ति या कारोबारी को नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस टीम की सराहना, जांच अभी जारी
डूंगरपुर पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने इस अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करने वाली साइबर सेल, विशेष टीम और संबंधित थानों की पुलिस की सराहना की है। जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करने की घोषणा भी की गई है।
फिलहाल पुलिस की जांच तीन प्रमुख सवालों पर केंद्रित है—गिरोह ने कितनी जाली मुद्रा तैयार की, उसे किन-किन इलाकों में खपाया गया और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही। साथ ही, नकली नोट तैयार करने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री, डिजिटल फाइलों और ऑनलाइन संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
‘ऑपरेशन नोटफ्लिक्स’ के तहत हुई कार्रवाई ने कथित तौर पर कई राज्यों में फैले नेटवर्क की कड़ियां उजागर की हैं। अब आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस गिरोह की गतिविधियों का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था और नकली मुद्रा के कारोबार में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।