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दिल्ली में 1 नवंबर की विपक्षी रैली पर व्यापारियों की चिंता, CTI ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र; तारीख बदलने की मांग

1 नवंबर की विपक्षी रैली पर व्यापारियों का विरोध! CTI ने राहुल गांधी के बाद अब सोनिया गांधी को लिखा पत्र, तारीख बदलने या जगह शिफ्ट करने की मांग—व्यापारियों ने 10 हजार करोड़ रुपये तक के नुकसान की जताई आशंका, क्या बदलेगा रैली का कार्यक्रम?

Pawan Kumar

• रिपोर्टर व न्यूज़ संपादक

4 मिनट दिल्ली

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दिल्ली में 1 नवंबर की विपक्षी रैली पर व्यापारियों की चिंता, CTI ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र; तारीख बदलने की मांग

Delhi Opposition Rally: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष की रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। इससे पहले संगठन राहुल गांधी से भी इस संबंध में आग्रह कर चुका है। CTI का कहना है कि रैली के कारण 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित हो सकता है, जिसका असर त्योहारी सीजन के कारोबार पर पड़ेगा।

व्यापारी संगठन ने दावा किया है कि दिल्ली के करीब 20 प्रमुख बाजारों में रोजाना 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। धनतेरस और दीपावली से पहले खरीदारी तथा माल की आवाजाही के लिहाज से ये दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में बड़े स्तर पर रैली होने से व्यापारियों, ग्राहकों और परिवहन से जुड़े लोगों को परेशानी हो सकती है।

CTI ने सोनिया गांधी के सामने रखीं दो मांगें

CTI ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में दो प्रमुख विकल्प सुझाए हैं। पहली मांग है कि 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को दीपावली के बाद यानी 10-11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारी खरीदारी और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

दूसरी मांग यह है कि यदि रैली निर्धारित तारीख पर ही आयोजित करनी है तो उसका स्थान रामलीला मैदान से बदलकर बुराड़ी मैदान कर दिया जाए। संगठन के मुताबिक, बुराड़ी मैदान में लगभग 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है। इससे मध्य दिल्ली के व्यस्त बाजारों और सड़कों पर दबाव कम किया जा सकता है।

10 अक्टूबर के प्रदर्शन का दिया उदाहरण

CTI ने अपने पत्र में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उदाहरण दिया है। संगठन का दावा है कि उस दिन करीब 5 से 7 हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद मध्य दिल्ली में लगभग आठ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था।

CTI ने आशंका जताई है कि यदि 1 नवंबर की रैली में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं तो राजधानी की यातायात व्यवस्था पर और अधिक दबाव पड़ सकता है। संगठन ने रैली में संभावित रूप से 10 लाख लोगों के आने की आशंका जताई है, हालांकि यह आयोजकों की ओर से पुष्टि किया गया आंकड़ा नहीं है।

धनतेरस और दिवाली के कारोबार पर असर की आशंका

व्यापारी संगठनों का कहना है कि धनतेरस और दीपावली से पहले दिल्ली के बाजारों में कारोबार अपने चरम पर रहता है। CTI के अनुसार, 6 नवंबर को धनतेरस है और उससे पहले व्यापारियों को दुकानों तक सामान पहुंचाने, स्टॉक तैयार करने तथा ग्राहकों की आवाजाही बनाए रखने की जरूरत है।

संगठन ने दावा किया है कि दिल्ली के आसपास के शहरों और कस्बों से रोजाना 3 से 4 लाख लोग खरीदारी के लिए राजधानी के अलग-अलग बाजारों में आते हैं। यदि रैली के कारण यातायात बाधित होता है तो ग्राहक बाजारों तक पहुंचने से बच सकते हैं। इससे खुदरा और थोक कारोबार दोनों प्रभावित होने की आशंका है।

राहुल गांधी के बाद अब सोनिया गांधी से लगाई गुहार

CTI ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा है कि उन्होंने हमेशा छोटे व्यापारियों की आवाज सुनी है और उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस नेतृत्व उनकी मांग पर विचार करेगा। संगठन के मुताबिक, राहुल गांधी से भी रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उनकी ओर से इसे स्वीकार नहीं किया गया।

अब CTI ने सोनिया गांधी से हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि रैली की तारीख या स्थान में बदलाव कर व्यापारियों को संभावित परेशानी से बचाया जा सके।

इस मुद्दे पर दिल्ली के अन्य व्यापारी संगठनों ने भी विपक्षी दलों के नेताओं से संपर्क किया है। सदर बाजार ट्रेड एसोसिएशन फेडरेशन और किराना कमेटी दिल्ली ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर कांग्रेस नेतृत्व के सामने व्यापारियों की चिंता रखने का आग्रह किया है।

इन संगठनों का कहना है कि रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में सदर बाजार, खारी बावली और चांदनी चौक समेत करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। ऐसे में रैली के दौरान यातायात प्रतिबंधों और भीड़ का असर इन बाजारों तक पहुंच सकता है।

25 हजार करोड़ के त्योहारी कारोबार पर असर का दावा

व्यापारी संगठनों ने अपने पत्रों में दावा किया है कि धनतेरस से दीपावली के बीच दिल्ली में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है। उनके मुताबिक, सितंबर और अक्टूबर में हुए विरोध प्रदर्शनों, रैलियों और यातायात प्रतिबंधों के कारण कारोबार को पहले ही करीब 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

संगठनों ने चेतावनी दी है कि खरीदारी के चरम समय में एक और बड़ी सभा आयोजित होने से 10 हजार करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि इसका प्रभाव केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रमिकों, डिलीवरी कर्मियों, परिवहन कारोबारियों और व्यापारिक गतिविधियों पर निर्भर अन्य लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।

रैली को लेकर अब कांग्रेस नेतृत्व के फैसले पर नजर

1 नवंबर की प्रस्तावित विपक्षी रैली को लेकर राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ व्यापारिक संगठनों की मांग भी चर्चा में आ गई है। एक ओर विपक्षी दलों का कार्यक्रम प्रस्तावित है, वहीं दूसरी ओर व्यापारी संगठन त्योहारी सीजन में बाजारों और यातायात को प्रभावित होने से बचाने की मांग कर रहे हैं।

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