रविवार, 18 अक्टूबर 2026
लोकतंत्र लाइव टीवी लोगो
ब्रेकिंग

सुप्रीम कोर्ट: इंटरनेट तक पहुंच बच्चों का मौलिक अधिकार, पूरी तरह रोक लगाना ठीक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बच्चों को इंटरनेट तक पहुंच का मौलिक अधिकार है और इस पर पूरी तरह रोक लगाना अनुपातहीन होगा। कोर्ट ने बाल यौन शोषण सामग्री हटाने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया।

ल

• संपादकीय डेस्क

2 मिनट नई दिल्ली

शेयर करें:
सुप्रीम कोर्ट: इंटरनेट तक पहुंच बच्चों का मौलिक अधिकार, पूरी तरह रोक लगाना ठीक नहीं
प्रतीकात्मक फोटो: सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली। Subhashish Panigrahi / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों और इंटरनेट को लेकर एक अहम फैसला दिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 15 अक्टूबर को कहा कि बच्चों को इंटरनेट तक पहुंच का मौलिक अधिकार है और इस पर पूरी तरह पाबंदी लगाना अनुपातहीन होगा। कोर्ट ने यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(a) से जोड़ा।

किस याचिका पर आया फैसला

यह आदेश गैर-सरकारी संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में सोशल मीडिया पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के बढ़ते मामलों का मुद्दा उठाया गया था।

कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा के उपाय नुकसानदेह सामग्री और उसे बनाने-फैलाने वालों पर केंद्रित होने चाहिए, न कि उन बच्चों पर जिनका सामना ऐसी सामग्री से होता है। पीठ ने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि इंटरनेट बच्चों के लिए सुरक्षित है। कोर्ट ने माता-पिता की सहमति, मार्गदर्शन और निगरानी पर जोर दिया और बच्चों के लिए अलग "चाइल्ड मोड" का सुझाव दिया, जिसमें अकाउंट डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट हों और अनजान वयस्कों के संपर्क पर रोक हो।

केंद्र को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को डिजिटल प्लेटफॉर्म से नाबालिगों से जुड़ी अश्लील सामग्री की पहचान कर उसे हटाने के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया है।

मुख्य बातें

  • इंटरनेट तक पहुंच बच्चों का मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21 और 19(1)(a))।
  • पूरी तरह रोक लगाना अनुपातहीन बताया गया।
  • "चाइल्ड मोड", प्राइवेट अकाउंट और माता-पिता की निगरानी पर जोर।
  • केंद्र को बाल यौन शोषण सामग्री हटाने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का निर्देश।

माता-पिता के लिए सुझाव

बच्चों के फोन और ऐप्स में पैरेंटल कंट्रोल चालू रखें, उनके सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट रखें और उन्हें समझाएं कि अनजान लोगों के मैसेज का जवाब न दें। कोई आपत्तिजनक सामग्री दिखे तो उसे cybercrime.gov.in पर या 1930 नंबर पर रिपोर्ट करें।

ऐसी ही ताज़ा खबरों के लिए लोकतंत्र लाइव टीवी के साथ जुड़े रहें। खबर या सूचना देने के लिए संपर्क करें: 9936640524।

शेयर करें:

ये भी पढ़ें

और देखें →