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आंखों की रोशनी बचाने के लिए अपनाएं ये आदतें, 20-20-20 नियम से कम होगा डिजिटल आई स्ट्रेन

लगातार मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या बढ़ सकती है। आंखों की थकान कम करने के लिए 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी जाती है—हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें।

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Pawan Kumar

3 मिनट luckhnow

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आंखों की रोशनी बचाने के लिए अपनाएं ये आदतें, 20-20-20 नियम से कम होगा डिजिटल आई स्ट्रेन
आंखों में किसी तरह की परेशानी होने तक हम अक्सर उनकी सेहत पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। लेकिन आज बच्चों से लेकर युवाओं तक में स्क्रीन टाइम बढ़ने और आंखों से जुड़ी समस्याएं सामने आने के कारण नियमित आई केयर जरूरी हो गया है

आंखों में किसी तरह की परेशानी होने तक हम अक्सर उनकी सेहत पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। लेकिन आज बच्चों से लेकर युवाओं तक में स्क्रीन टाइम बढ़ने और आंखों से जुड़ी समस्याएं सामने आने के कारण नियमित आई केयर जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर जांच, आंखों के लिए नुकसानदायक स्थितियों से बचाव और जरूरत पड़ने पर सही इलाज से कई तरह की दृष्टि संबंधी समस्याओं को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

नियमित आंखों की जांच है जरूरी

आंखों की समस्या हमेशा लक्षणों के साथ सामने आए, यह जरूरी नहीं है। इसलिए युवाओं को समय-समय पर आंखों की पूरी जांच करानी चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या परिवार में ग्लूकोमा और अन्य आंखों की बीमारियों का इतिहास होने पर नियमित जांच की जरूरत और बढ़ जाती है।

बच्चों की आंखों की जांच पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर बच्चा बार-बार सिरदर्द की शिकायत करता है, पढ़ने में परेशानी होती है, आंखें मलता है, आंखें सिकोड़कर देखता है या स्कूल में बोर्ड देखने में दिक्कत महसूस करता है तो उसकी नजर की जांच कराना जरूरी हो सकता है।

खेल और काम के दौरान आंखों की सुरक्षा

खेलते समय या मशीनरी और केमिकल के साथ काम करते समय आंखों पर चोट लगने का खतरा रहता है। ऐसे में उचित आई प्रोटेक्शन पहनना आंखों को गंभीर चोट से बचाने में मदद कर सकता है। खासकर उन जगहों पर जहां धूल, केमिकल या उड़ते हुए कणों से आंखों को नुकसान पहुंच सकता है, सुरक्षा चश्मे का इस्तेमाल जरूरी है।

स्क्रीन इस्तेमाल करते हैं तो अपनाएं 20-20-20 नियम

लैपटॉप, कंप्यूटर और मोबाइल जैसी डिजिटल स्क्रीन का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से आंखों में थकान और डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए **20-20-20 नियम** अपनाया जा सकता है।

इस नियम के अनुसार, हर 20 मिनट में लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखना चाहिए। इसके अलावा स्क्रीन पर काम करते समय पर्याप्त रोशनी रखें, स्क्रीन को आंखों से उचित दूरी पर रखें और नियमित रूप से पलकें झपकाते रहें। पर्याप्त नींद लेना भी आंखों को आराम देने के लिए जरूरी है।

कौन-कौन सी बीमारियां आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकती हैं?

नजर कमजोर होने या दृष्टि संबंधी समस्या की शुरुआत हमेशा किसी गंभीर लक्षण से नहीं होती। **कैटरेक्ट, ग्लूकोमा, डायबिटिक आई डिजीज, रिफ्रैक्टिव एरर, कॉर्निया और रेटिना से जुड़ी बीमारियां** धीरे-धीरे नजर को प्रभावित कर सकती हैं।

कैटरेक्ट दुनिया भर में दृष्टि कमजोर होने के प्रमुख कारणों में शामिल है और इसका इलाज संभव है। वहीं ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये लंबे समय तक स्पष्ट लक्षणों के बिना भी बढ़ सकती हैं।

ग्लूकोमा ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाकर नजर को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है। वहीं डायबिटीज से रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे समय के साथ दृष्टि कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है।

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

* समय-समय पर आंखों की जांच कराएं।
* स्क्रीन पर लगातार देखने के बीच नियमित ब्रेक लें।
* 20-20-20 नियम अपनाएं।
* पढ़ते या स्क्रीन देखते समय पर्याप्त रोशनी रखें।
* आंखों को बार-बार मलने से बचें।
* खेल और जोखिम वाले कामों के दौरान सुरक्षा चश्मा पहनें।
* पर्याप्त नींद लें।
* डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों को नियंत्रित रखें।
* नजर में अचानक बदलाव, धुंधलापन, दर्द या अन्य असामान्य लक्षण होने पर नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। आंखों से जुड़ी किसी बीमारी, लगातार लक्षण या नजर में बदलाव की स्थिति में योग्य नेत्र विशेषज्ञ से जांच और सलाह लें।

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