अंबेडकरनगर जिले से गुजरने वाले दो एक्सप्रेसवे पर हादसे बढ़ रहे हैं, लेकिन घायलों को तुरंत इलाज देने के लिए प्रस्तावित दो ट्रॉमा सेंटर का इंतजार करीब एक साल से खत्म नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने लगभग एक साल पहले शासन को इनका प्रस्ताव भेजा था।
कहां बनने हैं ट्रॉमा सेंटर
- बेवाना: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास
- राजेसुल्तानपुर: गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के पास
कहां अटका मामला
बेवाना वाले प्रस्ताव पर निदेशालय ने जोनल अस्पतालों से दूरी समेत कुछ अतिरिक्त जानकारी मांगी थी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार के मुताबिक मांगी गई सारी जानकारी भेज दी गई है और उम्मीद है कि जल्द ट्रॉमा सेंटर शुरू होगा। राजेसुल्तानपुर वाले प्रस्ताव में कई प्रक्रियागत अड़चनें हैं। सीएमओ के अनुसार वहां ट्रॉमा सेंटर चलाने में कई कारणों से दिक्कत आ रही है।
मरीजों पर क्या असर
अभी एक्सप्रेसवे पर हादसे में गंभीर रूप से घायल लोगों को लंबी दूरी तय कर जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ता है। इलाज में देरी से कई बार घायलों की हालत और बिगड़ जाती है। हादसों के बाद का पहला घंटा, जिसे 'गोल्डन आवर' कहा जाता है, जान बचाने में सबसे अहम होता है। स्थानीय स्तर पर ट्रॉमा सेंटर बनने से घायलों को तुरंत इलाज मिल सकेगा।





