गांधी जयंती की छुट्टी पर हरदोई मेडिकल कॉलेज में हाथ में चोट लगी ढाई साल की कनक को लेकर परिजन ओपीडी से पीकू और फिर इमरजेंसी तक तीन घंटे भटकते रहे। प्रधानाचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने कहा कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है।
हरदोई मेडिकल कॉलेज में छोटे बच्चों के इलाज की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। गांधी जयंती की छुट्टी के दिन भदाचा गांव के परिजन ढाई साल की बच्ची कनक को लेकर इलाज के लिए तीन घंटे से ज्यादा समय तक एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर लगाते रहे। बच्ची के हाथ में चोट लगी थी।
परिजनों के मुताबिक पहले उन्हें ओपीडी से पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड भेजा गया। वहां से फिर इमरजेंसी भेज दिया गया। दर्द से रोती बच्ची को गोद में लिए परिजन इधर-उधर भटकते रहे।
इमरजेंसी में हुआ इलाज
आखिर में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. शेर सिंह ने बच्ची की जांच की और एक्स-रे कराने की सलाह दी। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. जेबी गोगोई का कहना है कि यह मामला अभी उनकी जानकारी में नहीं आया है।
छुट्टी के दिन सबसे ज्यादा परेशानी
छुट्टी और त्योहार के दिनों में ओपीडी बंद रहती है और ज्यादातर मरीज इमरजेंसी पर निर्भर होते हैं। ऐसे में साफ जानकारी न मिलने से मरीजों को एक काउंटर से दूसरे काउंटर पर भेजे जाने की शिकायतें आम हैं। बच्चों के मामले में यह देरी और भी खतरनाक हो सकती है।
- अस्पताल: मेडिकल कॉलेज, हरदोई
- मरीज: ढाई साल की कनक, गांव भदाचा
- परेशानी: ओपीडी से पीकू, पीकू से इमरजेंसी तक तीन घंटे से ज्यादा चक्कर
- दिन: 2 अक्टूबर, गांधी जयंती की छुट्टी
मरीज और परिजन क्या करें
सरकारी अस्पताल में छुट्टी के दिन या रात में सीधे इमरजेंसी में जाएं और वहां पर्ची बनवाएं। अगर इलाज में देरी हो या बार-बार दूसरे विभाग भेजा जाए, तो अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक या प्रधानाचार्य कार्यालय में शिकायत करें। यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायत 1076 (मुख्यमंत्री हेल्पलाइन) पर भी दर्ज कराई जा सकती है।
हरदोई में इन दिनों बाढ़ से भी हालात खराब हैं। भवन, बिलग्राम और सदर तहसील के 30 गांवों में पानी भरा है।
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