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कैंसर की दवाएं 70% तक हो सकती हैं सस्ती, सरकार के फैसले से मरीजों को राहत की उम्मीद

केंद्र सरकार ने कैंसर मरीजों को राहत देने के लिए गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित करने का फैसला किया है। इससे करीब 110 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में 70% तक कमी आने की उम्मीद है।

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Pawan Kumar

3 मिनट luckhnow

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कैंसर की दवाएं 70% तक हो सकती हैं सस्ती, सरकार के फैसले से मरीजों को राहत की उम्मीद
कैंसर का इलाज मरीज के साथ-साथ पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी भारी पड़ता है।

कैंसर का इलाज मरीज के साथ-साथ पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी भारी पड़ता है। अस्पताल, जांच और महंगी दवाओं का खर्च कई परिवारों की जमा-पूंजी तक खत्म कर देता है। ऐसे में केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं को अधिक किफायती बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित करने को मंजूरी दी है। सरकार का अनुमान है कि इससे कुछ दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत यानी MRP में 20 से 70 प्रतिशत तक कमी आ सकती है और मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।

किन कैंसर दवाओं पर लागू होगा नया नियम?

यह व्यवस्था उन कैंसर दवाओं के लिए है, जो फिलहाल सरकार की निर्धारित मूल्य-सीमा वाली सूची में शामिल नहीं हैं। इनमें ब्रांडेड और जेनेरिक के साथ देश में बनी तथा विदेश से आयात की जाने वाली दवाएं भी शामिल हो सकती हैं। दवा मूल्य नियामक संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के मुताबिक, विशेषज्ञ समिति यह तय करेगी कि किन दवाओं को इस व्यवस्था के दायरे में रखा जाए। समिति से 14 अक्टूबर तक रिपोर्ट देने को कहा गया है। अंतिम सूची और संबंधित अधिसूचना के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-सी दवा की कीमत कितनी घटेगी। 

क्या होता है ट्रेड मार्जिन?

जब कोई दवा निर्माता से निकलकर वितरक, थोक विक्रेता और खुदरा दुकानदार के जरिए मरीज तक पहुंचती है, तो आपूर्ति श्रृंखला की अलग-अलग कड़ियों पर कीमत में मार्जिन जुड़ सकता है। इसी अंतर को ट्रेड मार्जिन कहा जाता है। NPPA के विश्लेषण के अनुसार, गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं में औसत ट्रेड मार्क-अप करीब 170 प्रतिशत तक पाया गया, जबकि कुछ मामलों में यह 700 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। नई व्यवस्था का उद्देश्य इस ऊंचे मार्जिन को सीमित करना और मरीजों के लिए दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाना है। 

2019 में भी घटे थे कैंसर की दवाओं के दाम

सरकार इससे पहले 2019 में भी 42 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित कर चुकी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उस कदम से 526 ब्रांड की कीमतों में कमी आई थी और मरीजों को सालाना करीब 984 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान लगाया गया था। अब इस व्यवस्था का विस्तार कैंसर की अन्य दवाओं तक करने की तैयारी है। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाया था महंगी दवाओं का मुद्दा

कैंसर की दवाओं की ऊंची कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है। 29 सितंबर की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसी दवा का उदाहरण आया, जिसकी खुदरा विक्रेता को आपूर्ति कीमत करीब 2,700 रुपये बताई गई, जबकि उसकी MRP लगभग 27,000 रुपये थी। अदालत ने दवाओं पर अत्यधिक मार्जिन और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर सवाल उठाए थे। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए निर्धारित बताई गई है। 

सरकार के इस फैसले से कैंसर के इलाज का खर्च कम होने की उम्मीद है। हालांकि, सभी दवाओं की कीमतों में एक समान कटौती नहीं होगी। वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन-सी दवाएं अंतिम सूची में शामिल होती हैं और उनकी मौजूदा कीमतों में कितना ट्रेड मार्जिन जुड़ा हुआ है।

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