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कुशीनगर: चार साल से बंद कप्तानगंज चीनी मिल को फिर चलाने की तैयारी

फरवरी 2022 से बंद कप्तानगंज चीनी मिल को 2027-28 पेराई सत्र में फिर चलाने की तैयारी है। प्रबंधन के मुताबिक नवंबर की शुरुआत से मरम्मत शुरू होगी, जिस पर 25 से 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे गन्ना किसानों और मज़दूरों को फायदा होगा।

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1 मिनट कुशीनगर

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कुशीनगर: चार साल से बंद कप्तानगंज चीनी मिल को फिर चलाने की तैयारी
प्रतीकात्मक फोटो: Rangan Datta Wiki / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

कुशीनगर। करीब चार साल से बंद पड़ी कप्तानगंज चीनी मिल के फिर से चालू होने की उम्मीद जगी है। मिल प्रबंधन ने इसे 2027-28 के पेराई सत्र में चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। 2021-22 का पेराई सत्र खत्म होने के बाद फरवरी 2022 से आर्थिक संकट के चलते मिल बंद है।

प्रबंधन ने किया निरीक्षण

गुरुवार को प्रबंधन के उपाध्यक्ष एसके श्रीवास्तव ने टीम के साथ मिल का निरीक्षण किया। टीम ने लंबे समय से बंद पड़ी मशीनों की हालत देखी और खराब हो चुकी इकाइयों की पहचान की। उपाध्यक्ष ने कहा कि कप्तानगंज मिल प्रबंधन की एक अहम इकाई है।

25 से 30 करोड़ की मरम्मत

प्रबंधन के मुताबिक नवंबर की शुरुआत से मरम्मत का काम शुरू होगा। खराब मशीनें बदलने और ज़रूरी मरम्मत पर करीब 25 से 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

किसानों को क्या फायदा

मिल बंद होने से इलाके के गन्ना किसानों को अपनी फसल दूर की मिलों तक ले जानी पड़ रही थी, जिससे ढुलाई का खर्च बढ़ा। मिल चलने पर किसानों को पास में ही गन्ना बेचने की सुविधा मिलेगी और मिल में काम करने वाले मज़दूरों को रोज़गार भी मिलेगा। प्रबंधन का कहना है कि पिछले सत्रों का किसानों का बकाया पूरा चुका दिया गया है और मिल चलने पर किसानों को गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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