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ओपन मैरिज में रही 70 के दशक की ये मॉडल, मुंबई के जुहू बीच पर बिना कपड़ों के लगाई थी दौड़

मुंबई: 1970 के दशक में भारतीय फैशन और ग्लैमर की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली मॉडल प्रोतिमा बेदी एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी बेबाक सोच, सामाजिक मान्यताओं को चुनौती देने वाले अंदाज और विवादित फैसलों के कारण वह अपने दौर की सबसे चर्चित हस्तियों में…

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V K Singh

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ओपन मैरिज में रही 70 के दशक की ये मॉडल, मुंबई के जुहू बीच पर बिना कपड़ों के लगाई थी दौड़

मुंबई: 1970 के दशक में भारतीय फैशन और ग्लैमर की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली मॉडल प्रोतिमा बेदी एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी बेबाक सोच, सामाजिक मान्यताओं को चुनौती देने वाले अंदाज और विवादित फैसलों के कारण वह अपने दौर की सबसे चर्चित हस्तियों में गिनी जाती थीं। उनका जीवन जितना सफल रहा, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा।

प्रोतिमा बेदी ने ऐसे समय में मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा, जब भारत में फैशन इंडस्ट्री शुरुआती दौर में थी। अपनी अलग शैली और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने जल्द ही बड़ी पहचान बना ली। हालांकि, उनकी लोकप्रियता केवल मॉडलिंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके निजी जीवन और सामाजिक विचार भी लगातार सुर्खियों में रहे।

प्रोतिमा बेदी ने अभिनेता कबीर बेदी से शादी की थी। दोनों ने अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की थी और यह स्वीकार किया था कि वे पारंपरिक वैवाहिक सोच से अलग जीवन जी रहे थे। उस दौर में उनके रिश्ते को लेकर काफी चर्चा हुई, क्योंकि ऐसी अवधारणाएं भारतीय समाज में बेहद असामान्य मानी जाती थीं। बाद में दोनों अलग हो गए।

प्रोतिमा बेदी सबसे ज्यादा उस घटना को लेकर चर्चा में आईं, जब उन्होंने मुंबई के जुहू बीच पर बिना कपड़ों के दौड़ लगाई थी। बताया जाता है कि यह कदम उन्होंने एक चर्चित पत्रिका के प्रचार अभियान के दौरान उठाया था। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी मचा दी थी। जहां कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया, वहीं कई लोगों ने इसकी कड़ी आलोचना भी की। यह घटना आज भी भारतीय ग्लैमर जगत के सबसे चर्चित विवादों में गिनी जाती है।

मॉडलिंग से आगे बढ़ते हुए प्रोतिमा बेदी ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य ओडिसी की ओर रुख किया। उन्होंने प्रसिद्ध गुरु केलुचरण महापात्र से प्रशिक्षण लिया और बाद में बेंगलुरु के पास नृत्यग्राम की स्थापना की। यह संस्थान आज भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रमुख केंद्रों में शामिल है और देश-विदेश के कलाकार यहां प्रशिक्षण लेने आते हैं।

साल 1998 में उत्तराखंड के मालपा क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन के दौरान प्रोतिमा बेदी की मृत्यु हो गई। उनके निधन ने कला और सांस्कृतिक जगत को गहरा झटका दिया। आज भी उन्हें एक ऐसी शख्सियत के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपने जीवन में कई परंपराओं को चुनौती दी और भारतीय फैशन तथा कला जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।

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