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क्या है फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी? कैसे करती है काम और क्या CNG से भी कम फैलाती है प्रदूषण?

दुनियाभर में बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियां नई-नई तकनीकों पर काम कर रही हैं। इन्हीं में से एक है फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी (Flex Fuel Technology), जिसे भारत में भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य…

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V K Singh

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क्या है फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी? कैसे करती है काम और क्या CNG से भी कम फैलाती है प्रदूषण?

दुनियाभर में बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियां नई-नई तकनीकों पर काम कर रही हैं। इन्हीं में से एक है फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी (Flex Fuel Technology), जिसे भारत में भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और किसानों से जुड़े इथेनॉल उद्योग को प्रोत्साहन देना है।

कैसे काम करती है फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी?

फ्लेक्स फ्यूल वाहन ऐसे इंजन से लैस होते हैं जो पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण पर चल सकते हैं। ये वाहन सामान्य पेट्रोल (E10 या E20) से लेकर E85 (85% इथेनॉल + 15% पेट्रोल) या कुछ मामलों में 100% इथेनॉल तक के मिश्रण पर भी चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।

वाहन में लगे सेंसर ईंधन में इथेनॉल की मात्रा का पता लगाते हैं और उसी के अनुसार इंजन की फ्यूल सप्लाई, इग्निशन टाइमिंग और अन्य सेटिंग्स को स्वतः समायोजित कर देते हैं। इससे इंजन बिना किसी परेशानी के अलग-अलग फ्यूल मिश्रण पर काम कर सकता है।

क्या CNG से भी कम प्रदूषण करती है?

फ्लेक्स फ्यूल और CNG दोनों का उद्देश्य प्रदूषण कम करना है, लेकिन दोनों की प्रकृति अलग है।

  • CNG वाहन आमतौर पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में कम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जित करते हैं।
  • फ्लेक्स फ्यूल (इथेनॉल आधारित) ईंधन को नवीकरणीय (Renewable) स्रोतों, जैसे गन्ना और अन्य बायोमास से तैयार किया जाता है। इसलिए इसके पूरे जीवन-चक्र (उत्पादन से उपयोग तक) में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम हो सकता है। हालांकि, टेलपाइप (एग्जॉस्ट) से निकलने वाले कुछ प्रदूषकों की मात्रा इंजन और इथेनॉल मिश्रण पर निर्भर करती है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि फ्लेक्स फ्यूल हर स्थिति में CNG से कम प्रदूषण फैलाता है। दोनों तकनीकों के अपने-अपने पर्यावरणीय फायदे हैं और उनका प्रभाव वाहन, ईंधन की गुणवत्ता तथा उपयोग की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

फ्लेक्स फ्यूल के प्रमुख फायदे

  • पेट्रोल पर निर्भरता कम होती है।
  • इथेनॉल जैसे घरेलू और नवीकरणीय ईंधन का उपयोग बढ़ता है।
  • किसानों और इथेनॉल उद्योग को बढ़ावा मिलता है।
  • कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटती है।

चुनौतियां भी हैं

फ्लेक्स फ्यूल तकनीक को सफल बनाने के लिए देशभर में इथेनॉल की पर्याप्त उपलब्धता, फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का व्यापक प्रसार जरूरी है। साथ ही, अधिक इथेनॉल मिश्रण पर माइलेज और ईंधन खपत में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक ईंधन समाधान मानी जा रही है। यह प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है, लेकिन इसे CNG से हर पहलू में बेहतर या कम प्रदूषणकारी कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।

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