नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को जैन की जमानत मंजूर कर दी। यह…
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को जैन की जमानत मंजूर कर दी। यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के STP प्रोजेक्ट्स में कथित टेंडर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
जैन को दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने अगस्त में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद 3 सितंबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।
क्या है दिल्ली जल बोर्ड का मामला?
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के ऑगमेंटेशन और अपग्रेडेशन से जुड़े टेंडरों में कथित गड़बड़ियों का है। ACB का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष तकनीक और निजी कंपनी को फायदा पहुंच सके।
जांच एजेंसी के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी शर्तें सीमित करने, प्रतिस्पर्धा कम करने और कुछ महत्वपूर्ण मानकों में बदलाव करने जैसे आरोप हैं। मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ फैसलों से सरकारी खजाने पर आर्थिक प्रभाव पड़ा।
2024 में दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में FIR 11 मई 2024 को दर्ज की गई थी। शिकायत दिल्ली सरकार के विजिलेंस निदेशालय की ओर से की गई थी। ACB ने बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, टेंडर शर्तों में कथित हेरफेर और आपराधिक साजिश के आरोपों के आधार पर जांच शुरू की थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड के 10 STP से संबंधित परियोजनाओं को चार पैकेज में बांटा गया था, जिनकी कुल टेंडर वैल्यू करीब 1,943 करोड़ रुपये बताई गई है।
अगस्त में हुई थी गिरफ्तारी
ACB ने अगस्त 2026 में सत्येंद्र जैन के साथ दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO उदित प्रकाश राय और चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जैन और कुछ अन्य आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
जैन की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि FIR 2024 में दर्ज हुई थी और उन्होंने जांच में सहयोग किया है। उनके वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि मामला मुख्य रूप से नीतिगत और तकनीकी फैसलों से जुड़ा है। दूसरी तरफ ACB ने जमानत का विरोध करते हुए जांच प्रभावित होने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई थी।
ACB ने लगाए थे गंभीर आरोप
ACB ने आरोप लगाया था कि जैन ने टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी ने दावा किया कि कुछ तकनीकी शर्तों के कारण प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और एक निजी कंपनी को कथित तौर पर फायदा पहुंचा।
जांच में कथित धन के लेन-देन और कमीशन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। हालांकि, ये सभी जांच एजेंसी के आरोप हैं, और अदालत में आरोप साबित होना अभी बाकी है।
जमानत का मतलब क्या?
सत्येंद्र जैन को इस मामले में जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया है। मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। कोर्ट में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
वहीं, मामले में शामिल अन्य आरोपियों की न्यायिक हिरासत को अदालत ने 17 सितंबर तक बढ़ा दिया है।
राजनीतिक रूप से भी अहम है फैसला
सत्येंद्र जैन को मिली जमानत को आम आदमी पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद AAP ने मामले को राजनीतिक कार्रवाई बताया था, जबकि जांच एजेंसियों और BJP की ओर से भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीर बताया गया था।
अब जमानत मिलने के बाद इस मामले को लेकर दिल्ली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। हालांकि, अंतिम तौर पर मामले में जैन की कानूनी स्थिति आगे की सुनवाई और अदालत के फैसलों से तय होगी।
फिलहाल बड़ी खबर यह है कि दिल्ली जल बोर्ड के कथित STP टेंडर घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत मिल गई है, जबकि मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।