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दुनिया में फिर मंडरा रहा तेल संकट, हूती के कब्जे ने बिगाड़े कई अहम रूट

दुनिया के कई हिस्सों में एक बार फिर तेल संकट की आशंका बढ़ती नजर आ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हूती समूह की गतिविधियों के कारण समुद्री व्यापार के कई महत्वपूर्ण रूट प्रभावित हुए हैं। इसका सीधा असर कच्चे तेल की सप्लाई, जहाजों की आवाजाही और वैश्विक…

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V K Singh

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दुनिया में फिर मंडरा रहा तेल संकट, हूती के कब्जे ने बिगाड़े कई अहम रूट

दुनिया के कई हिस्सों में एक बार फिर तेल संकट की आशंका बढ़ती नजर आ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हूती समूह की गतिविधियों के कारण समुद्री व्यापार के कई महत्वपूर्ण रूट प्रभावित हुए हैं। इसका सीधा असर कच्चे तेल की सप्लाई, जहाजों की आवाजाही और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। अगर हालात लंबे समय तक सामान्य नहीं हुए तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

लाल सागर और उसके आसपास का समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यूरोप और एशिया के बीच बड़ी मात्रा में सामान और ऊर्जा उत्पाद इसी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। हूती हमलों के खतरे के चलते कई शिपिंग कंपनियां पहले ही वैकल्पिक लंबे रास्तों का इस्तेमाल कर चुकी हैं। इससे जहाजों की यात्रा का समय और परिवहन लागत बढ़ जाती है।

तेल बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर असुरक्षा बढ़ती है, तो कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका पैदा होती है। तेल की सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर तेजी से पड़ सकता है। इसके चलते पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी पश्चिम एशिया की स्थिति महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर आयात बिल बढ़ सकता है और इसका असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हालांकि घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।

जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि पश्चिम एशिया में तनाव किस दिशा में जाता है और समुद्री व्यापार के प्रमुख रास्ते कितनी जल्दी सामान्य होते हैं। यदि तनाव सीमित रहता है तो तेल बाजार पर दबाव भी सीमित रह सकता है, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

यानी आने वाले समय में तेल की कीमतों के लिए सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि तेल की सुरक्षित आवाजाही और समुद्री रूट की सुरक्षा भी सबसे बड़ा मुद्दा बन सकती है। यही वजह है कि हूती गतिविधियों और लाल सागर के घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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