सुल्तानपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी के एक मामले में अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) नवनीत सिंह की अदालत ने कई बार आदेश जारी होने के बावजूद रिपोर्ट प्रस्तुत न किए जाने को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्राधिकारी (सीओ) नगर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। अदालत ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक के माध्यम से सीओ से स्पष्टीकरण भी मांगा है, जिससे पुलिस विभाग में हलचल मच गई है।
मामला कोतवाली देहात क्षेत्र के कपिसामिश्र का पुरवा-हनुमानगंज निवासी अर्पित कुमार मिश्रा की ओर से दायर प्रार्थना पत्र से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुड़वार थाना क्षेत्र के ख्वाजापुर तिवारीपुर निवासी हिमांशु शुक्ला ने स्वयं को एक इंटर कॉलेज का प्रबंधक बताकर सहायक लिपिक के पद पर नियुक्ति दिलाने का झांसा दिया और पांच लाख रुपये ले लिए। शिकायत में हिमांशु शुक्ला के साथ वासुदेव पांडेय, अजिताभ श्रीवास्तव और वरुणेंद्र सिंह की भी भूमिका होने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित का कहना है कि न तो नौकरी मिली और न ही उसकी रकम वापस की गई।
अदालत ने इस मामले में 28 मार्च से अब तक कई बार कोतवाली नगर पुलिस को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, लेकिन पुलिस की ओर से कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई। लगातार आदेशों की अनदेखी और न्यायिक प्रक्रिया में देरी को देखते हुए सीजेएम कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। अदालत ने सीओ नगर को 19 जून को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है, साथ ही आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है। अब इस मामले में पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।







