नई दिल्ली:
हर खिलाड़ी की सफलता के पीछे संघर्ष की एक अलग कहानी होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है एक भारतीय बॉक्सर की, जिसके पिता का सपना था कि उनका बेटा पढ़-लिखकर IIT में दाखिला ले और इंजीनियर बने। लेकिन किस्मत ने उसके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। स्कूल के दिनों में होने वाले झगड़े और मारपीट ने उसे बॉक्सिंग रिंग तक पहुंचा दिया, जहां उसने अपनी मेहनत और लगन के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।
शुरुआती दिनों में खिलाड़ी पढ़ाई में भी अच्छा था और परिवार चाहता था कि वह इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाए। लेकिन स्कूल में बार-बार होने वाले झगड़ों और आक्रामक स्वभाव को सही दिशा देने के लिए परिवार ने उसे बॉक्सिंग की ट्रेनिंग दिलाने का फैसला किया। यही फैसला उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
रिंग में उतरने के बाद उसने अपनी ऊर्जा को खेल में लगाया और लगातार कड़ी मेहनत की। शुरुआती स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के बाद उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।








