नई दिल्ली: हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सामरिक और समुद्री ताकत को लगातार मजबूत कर रहा भारत अब एक ऐसे रणनीतिक बिंदु पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, जिसे भविष्य की वैश्विक समुद्री राजनीति का अहम केंद्र माना जा रहा है। इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट को लेकर भारत और…
नई दिल्ली: हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सामरिक और समुद्री ताकत को लगातार मजबूत कर रहा भारत अब एक ऐसे रणनीतिक बिंदु पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, जिसे भविष्य की वैश्विक समुद्री राजनीति का अहम केंद्र माना जा रहा है। इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट को लेकर भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते सहयोग ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के प्रवेश द्वार पर स्थित सबांग पोर्ट को हिंद महासागर का नया “होर्मुज” कहा जा रहा है, क्योंकि यहां से गुजरने वाले समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सबांग पोर्ट इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में स्थित है और यह मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल मलक्का से हर साल हजारों मालवाहक और तेल टैंकर गुजरते हैं। एशिया, यूरोप और मध्य-पूर्व के बीच होने वाले बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार इसी मार्ग से संचालित होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भागीदारी न केवल उसकी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी भूमिका को भी नई मजबूती देगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग पोर्ट पर भारत की भागीदारी का सबसे बड़ा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री निगरानी क्षमता को बढ़ाना और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत लंबे समय से “सागर” (Security and Growth for All in the Region) और मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत (Free and Open Indo-Pacific) की नीति पर काम कर रहा है। सबांग पोर्ट इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
रणनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो जिस प्रकार पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, उसी तरह मलक्का जलडमरूमध्य एशिया की आर्थिक गतिविधियों की जीवनरेखा माना जाता है। यदि किसी संकट की स्थिति में इस मार्ग पर असर पड़ता है तो पूरी दुनिया के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इस क्षेत्र में मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाना भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा एवं समुद्री सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देश नौसैनिक अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और समुद्री डोमेन जागरूकता जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। सबांग पोर्ट का विकास दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामरिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपनी समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। अंडमान एवं निकोबार कमान की रणनीतिक स्थिति और सबांग पोर्ट के साथ बढ़ता सहयोग भविष्य में भारत की समुद्री रणनीति को और अधिक प्रभावी बना सकता है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि सबांग पोर्ट इंडोनेशिया का बंदरगाह है और वहां भारत की भूमिका दोनों देशों के बीच सहयोग एवं सहमति के दायरे में है। इसे किसी सैन्य अड्डे के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा साझेदारी के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।
आने वाले वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच सबांग पोर्ट भारत की समुद्री रणनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। इससे न केवल क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक पहुंच और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी भूमिका भी पहले से अधिक मजबूत होने की संभावना है।