देश के रियल एस्टेट बाजार में इन दिनों एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिल रही है। जहां एक ओर घर खरीदने वाले अधिकांश लोग 2 BHK फ्लैट को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई शहरों में बिल्डर्स का फोकस अब भी 3 BHK प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा है। मांग और सप्लाई के
देश के रियल एस्टेट बाजार में इन दिनों एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिल रही है। जहां एक ओर घर खरीदने वाले अधिकांश लोग 2 BHK फ्लैट को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई शहरों में बिल्डर्स का फोकस अब भी 3 BHK प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा है। मांग और सप्लाई के इस असंतुलन ने रियल एस्टेट सेक्टर में नई चुनौती खड़ी कर दी है।
प्रॉपर्टी मार्केट से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, ऊंची होम लोन ईएमआई और सीमित बजट के कारण मिडिल क्लास खरीदार 2 BHK फ्लैट को प्राथमिकता दे रहे हैं। छोटे परिवारों और नौकरीपेशा लोगों के लिए 2 BHK घर कीमत और रखरखाव दोनों के लिहाज से ज्यादा सुविधाजनक साबित हो रहा है।
इसके उलट, कई बड़े बिल्डर्स 3 BHK और लग्जरी अपार्टमेंट्स पर ज्यादा निवेश कर रहे हैं। उनका मानना है कि बड़े फ्लैट्स में प्रति यूनिट अधिक मुनाफा मिलता है और प्रीमियम हाउसिंग से बेहतर रिटर्न हासिल होता है। यही वजह है कि कई शहरों में 3 BHK की नई सप्लाई लगातार बढ़ रही है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, इस असंतुलन का असर बिक्री पर भी दिखाई देने लगा है। कई परियोजनाओं में 3 BHK फ्लैट्स की बिक्री अपेक्षा से धीमी है, जबकि अच्छी लोकेशन वाले 2 BHK फ्लैट्स तेजी से बिक रहे हैं। इससे बिल्डर्स को अपनी नई परियोजनाओं की रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यदि बिल्डर्स खरीदारों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार प्रोजेक्ट लॉन्च करते हैं, तो बाजार में संतुलन बेहतर हो सकता है। खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में किफायती आवास की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे 2 BHK सेगमेंट को और मजबूती मिलने की संभावना है।
होमबायर्स का कहना है कि वे बड़े घर की बजाय ऐसा फ्लैट चाहते हैं जो उनके बजट में हो, ईएमआई संभालने लायक हो और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर सके। यही कारण है कि 2 BHK की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि डेवलपर्स समय रहते बाजार की बदलती जरूरतों को समझते हैं और 2 BHK सेगमेंट में अधिक प्रोजेक्ट लाते हैं, तो इससे खरीदारों और बिल्डर्स दोनों को फायदा हो सकता है। फिलहाल, भारतीय रियल एस्टेट बाजार में मांग और सप्लाई का यह असंतुलन सेक्टर के लिए चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।