तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 2013 के रेप मामले में सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत के सामने सरेंडर कर दिया। यह सरेंडर सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद हुआ है, जिसमें अदालत ने उन्हें अपनी सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई से पहले आत्मसमर्पण करने का…
तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 2013 के रेप मामले में सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत के सामने सरेंडर कर दिया। यह सरेंडर सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद हुआ है, जिसमें अदालत ने उन्हें अपनी सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई से पहले आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में तेजपाल की सरेंडर से छूट की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर आत्मसमर्पण करने को कहा था।
2013 में सामने आया था मामला
यह मामला नवंबर 2013 का है। एक महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर गोवा के एक होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और बलात्कार का आरोप लगाया था। आरोपों के बाद तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मामले की लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और अलग-अलग अदालतों में इसकी सुनवाई हुई।
मामले में 2021 में गोवा की एक अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया था। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने उस फैसले को पलटते हुए अगस्त 2026 में उन्हें दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसी फैसले के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया था सरेंडर का आदेश?
तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि उनकी अपील पर पहले सुनवाई की जाए और तब तक उन्हें सरेंडर करने से छूट दी जाए। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि उपयुक्त मामलों में अदालत के पास सरेंडर की शर्त से छूट देने का अधिकार है।
हालांकि, गोवा सरकार ने इस मांग का विरोध किया। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले और 10 साल की सजा का हवाला देते हुए सरेंडर से छूट देने का विरोध किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को राहत देने से इनकार कर दिया और उन्हें सरेंडर करने का निर्देश दिया।
तीन हफ्ते की मिली थी मोहलत
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में तेजपाल को सरेंडर करने के लिए सीमित समय दिया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि उन्हें सरेंडर कर उसका प्रमाणपत्र कोर्ट में जमा करना होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने यह भी कहा था कि सरेंडर प्रमाणपत्र जमा होने के बाद उनकी आपराधिक अपील को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है।
तेजपाल ने अब तय समय-सीमा के भीतर गोवा की मापुसा अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। इसके बाद उनकी सजा और सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रिपोर्टों के अनुसार, सरेंडर के बाद उन्हें सजा काटने के लिए जेल भेज दिया गया है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में तेजपाल की आपराधिक अपील पर सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। तेजपाल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सरेंडर करने के बाद उनकी अपील की सुनवाई का रास्ता आगे बढ़ सकता है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर लंबे समय से चल रहे 2013 के प्रकरण को सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में अपील अभी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसला शीर्ष अदालत की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।