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सावन में संजय निषाद ने मछली को बताया 'शाकाहारी', बोले- 'बिना लहसुन-प्याज के बनाएं'

लखनऊ। सावन के पवित्र महीने के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में मछली और खान-पान को लेकर एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। निषाद पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद का एक बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा में है, जिसमें…

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V K Singh

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सावन में संजय निषाद ने मछली को बताया 'शाकाहारी', बोले- 'बिना लहसुन-प्याज के बनाएं'

लखनऊ। सावन के पवित्र महीने के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में मछली और खान-पान को लेकर एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। निषाद पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद का एक बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा में है, जिसमें उन्होंने मछली को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे लेकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

संजय निषाद ने मछली को ‘शाकाहारी’ बताते हुए इसे बिना लहसुन-प्याज के बनाने की बात कही। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। जहां कुछ लोग इसे उनके समुदाय और मछली से जुड़े पारंपरिक खान-पान के संदर्भ में देख रहे हैं, वहीं कुछ लोग उनके बयान पर सवाल भी उठा रहे हैं।

सावन में खान-पान को लेकर अलग-अलग परंपराएं

सावन का महीना हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं और सात्विक भोजन का पालन करते हैं। कई धार्मिक परंपराओं में सावन के दौरान मांस, मछली और अंडे से परहेज किया जाता है। इसी तरह कई परिवार प्याज और लहसुन का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं।

हालांकि, खान-पान से जुड़े नियम हर परिवार, क्षेत्र और परंपरा में एक जैसे नहीं होते। कई लोग पूरे सावन में मांसाहार से दूरी रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल व्रत या सोमवार के दिन इन चीजों का सेवन नहीं करते।

मछली को लेकर संजय निषाद की टिप्पणी

संजय निषाद लंबे समय से मछुआरा समाज और निषाद समुदाय से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उठाते रहे हैं। ऐसे में मछली को लेकर उनकी टिप्पणी को उनके समर्थक समुदाय से जुड़े संदर्भ में भी देख रहे हैं।

उनकी ओर से मछली को शाकाहारी बताए जाने और बिना लहसुन-प्याज के पकाने की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की। कुछ लोगों ने इसे बयानबाजी करार दिया तो कुछ ने कहा कि इसे उनके पारंपरिक खान-पान और सांस्कृतिक संदर्भ में समझना चाहिए।

क्या मछली शाकाहारी मानी जाती है?

आम तौर पर भोजन की परिभाषा में मछली को मांसाहारी यानी नॉन-वेज खाद्य पदार्थ माना जाता है। इसे बिना प्याज और लहसुन के पकाने से उसकी यह श्रेणी नहीं बदलती। हालांकि, भारत में अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों में भोजन को लेकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक मान्यताएं अलग-अलग हैं।

सावन के दौरान सात्विक भोजन को लेकर भी यही स्थिति है। कई परिवार प्याज और लहसुन के बिना भोजन करते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं।

बयान पर राजनीतिक चर्चा तेज

संजय निषाद के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से बयान को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं, जबकि निषाद समुदाय से जुड़े समर्थक इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं।

दरअसल, संजय निषाद इससे पहले भी मछली, मछुआरों के अधिकार और निषाद समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए चर्चा में रहे हैं। यही वजह है कि सावन के दौरान आया यह बयान तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है।

सावन में सात्विक भोजन पर जोर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में कई श्रद्धालु हल्का और सात्विक भोजन करते हैं। फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन आम तौर पर व्रत के दौरान खाए जाते हैं। प्याज और लहसुन से परहेज भी कई परिवारों की परंपरा का हिस्सा है।

ऐसे में सावन के बीच संजय निषाद का मछली को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का नया विषय बन गया है। हालांकि, उनके बयान का पूरा संदर्भ और मूल वीडियो सामने होने पर ही उनकी टिप्पणी का सही आशय पूरी तरह स्पष्ट किया जा सकता है।

फिलहाल मछली को ‘शाकाहारी’ बताए जाने वाली टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है और लोग इसे अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।

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