बस्ती। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बस्ती जिले की रुधौली विधानसभा सीट के पूर्व विधायक रामललित चौधरी का निधन हो गया है। वे तीन बार विधायक रह चुके थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही बस्ती और आसपास के राजनीतिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई।
रामललित चौधरी पिछले करीब 15 दिनों से अधिक समय से बीमार चल रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले गिरने के बाद उन्हें गंभीर अंदरूनी चोटें आई थीं। इसके बाद उनका लखनऊ में इलाज चल रहा था। 17 सितंबर की रात उन्होंने अंतिम सांस ली।
रामललित चौधरी का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा। उन्होंने छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। बाद में वह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के संपर्क में आए और उनके करीबी सहयोगी के रूप में भी काम किया। रिपोर्ट के मुताबिक, चौधरी चरण सिंह के प्रधानमंत्री रहने के दौरान रामललित चौधरी उनके निजी सहायक यानी पीए भी रहे थे।
1989 में पहली बार बने विधायक
रामललित चौधरी ने 1989 में पहली बार रामनगर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद 1991 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। वर्ष 1996 में उन्होंने तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीता। उस समय उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस तरह उन्होंने कुल तीन बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
बाद में रामनगर विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलकर रुधौली विधानसभा क्षेत्र हो गया। लंबे राजनीतिक अनुभव के चलते पूर्वांचल की राजनीति में उनकी पहचान एक वरिष्ठ नेता के रूप में रही।
लंबे समय तक सपा से जुड़े रहे
रामललित चौधरी लंबे समय तक समाजवादी राजनीति से भी जुड़े रहे। पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने करीब चार दशक तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहकर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। बाद के वर्षों में उन्होंने सपा छोड़कर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का दामन थामा।
साल 2023 में वह सुभासपा में शामिल हुए और पार्टी में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद वह संगठन में सक्रिय रहे।
पैतृक गांव लाया जाएगा पार्थिव शरीर
रामललित चौधरी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव परसा लाल शाही लाए जाने की जानकारी है। यहां लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे। उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां भी की जा रही हैं। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के भी उनके गांव पहुंचने की संभावना जताई गई है।
रामललित चौधरी के निधन पर सुभासपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया है। उनके निधन को पार्टी और क्षेत्र की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में बताया जा रहा है। लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने विधानसभा के साथ-साथ संगठनात्मक और सामाजिक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाई।
उनके निधन के बाद अब बस्ती और रुधौली क्षेत्र में उनके राजनीतिक जीवन और लंबे सार्वजनिक योगदान को याद किया जा रहा है। तीन बार विधायक और सुभासपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में उनकी राजनीतिक यात्रा काफी लंबी रही।








