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सूरज की रोशनी चली जाए तो कितनी देर में धरती पर छाएगा अंधेरा? जानें पूरा विज्ञान

क्या आपने कभी सोचा है कि अगर सूरज अचानक गायब हो जाए, तो धरती पर क्या होगा? क्या उसी पल आसमान में अंधेरा छा जाएगा या फिर कुछ समय तक सूरज की रोशनी दिखाई देती रहेगी? इसका जवाब काफी दिलचस्प है। अगर किसी काल्पनिक स्थिति में सूरज अचानक गायब हो जाए, तो धरती पर मौजूद

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V K Singh

3 मिनट

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सूरज की रोशनी चली जाए तो कितनी देर में धरती पर छाएगा अंधेरा? जानें पूरा विज्ञान

क्या आपने कभी सोचा है कि अगर सूरज अचानक गायब हो जाए, तो धरती पर क्या होगा? क्या उसी पल आसमान में अंधेरा छा जाएगा या फिर कुछ समय तक सूरज की रोशनी दिखाई देती रहेगी? इसका जवाब काफी दिलचस्प है।

अगर किसी काल्पनिक स्थिति में सूरज अचानक गायब हो जाए, तो धरती पर मौजूद लोगों को इसका असर तुरंत महसूस नहीं होगा। सूरज की रोशनी को धरती तक पहुंचने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं। इसलिए सूरज के गायब होने के बाद भी करीब 8 मिनट 20 सेकंड तक धरती पर उसकी रोशनी आती रहेगी।

इसके बाद अचानक दिन का उजाला खत्म हो जाएगा और धरती पर अंधेरा छा जाएगा।

आखिर 8 मिनट 20 सेकंड की देरी क्यों?

इसका कारण प्रकाश की गति है। अंतरिक्ष में प्रकाश लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से यात्रा करता है।

सूरज और धरती के बीच औसत दूरी करीब 15 करोड़ किलोमीटर है। इतनी बड़ी दूरी तय करने में सूर्य की रोशनी को लगभग 8 मिनट 20 सेकंड का समय लगता है।

यानी हम सूरज को वास्तव में उसके बिल्कुल वर्तमान क्षण में नहीं देखते, बल्कि करीब 8 मिनट 20 सेकंड पहले की उसकी स्थिति देखते हैं।

इसी वजह से अगर काल्पनिक रूप से सूरज उसी क्षण गायब हो जाए, तो हमें इसकी जानकारी भी लगभग 8 मिनट 20 सेकंड बाद ही होगी।

क्या सिर्फ रोशनी ही 8 मिनट बाद रुकेगी?

नहीं, यहां एक और बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक बात है।

सूरज का गुरुत्वाकर्षण भी धरती समेत सौरमंडल के ग्रहों को प्रभावित करता है। आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के अनुसार गुरुत्वाकर्षण से जुड़ी जानकारी में बदलाव भी प्रकाश की गति से ही फैलता है।

इसलिए काल्पनिक तौर पर सूरज के अचानक गायब होने की स्थिति में धरती करीब 8 मिनट 20 सेकंड तक अपनी मौजूदा कक्षा के अनुसार चलती रहेगी। उसके बाद सूर्य के गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव न मिलने पर धरती की गति और दिशा बदल जाएगी।

हालांकि, वास्तविक ब्रह्मांड में सूरज का अचानक गायब हो जाना संभव नहीं है। यह केवल विज्ञान को समझने के लिए बनाई गई एक काल्पनिक स्थिति है।

अंधेरा होने के बाद क्या होगा?

सूरज की रोशनी खत्म होने के बाद सबसे पहला स्पष्ट असर अंधेरा होगा। चंद्रमा भी सामान्य तरीके से चमकता हुआ दिखाई नहीं देगा, क्योंकि चंद्रमा अपनी रोशनी खुद पैदा नहीं करता बल्कि सूर्य की रोशनी को परावर्तित करता है।

कुछ समय बाद धरती के तापमान पर भी गंभीर प्रभाव पड़ना शुरू होगा। सूर्य पृथ्वी के लिए प्रकाश और गर्मी का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। उसके बिना धरती धीरे-धीरे बेहद ठंडी होने लगेगी।

पौधों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा क्योंकि वे प्रकाश संश्लेषण के लिए सूर्य के प्रकाश पर निर्भर रहते हैं।

क्या सूरज गायब होते ही धरती जम जाएगी?

नहीं। धरती तुरंत बर्फ की गेंद नहीं बन जाएगी।

धरती के पास पहले से मौजूद गर्मी और वातावरण में मौजूद ऊर्जा के कारण तापमान धीरे-धीरे कम होगा। समुद्र और जमीन भी कुछ समय तक गर्मी बनाए रखेंगे।

लेकिन लंबे समय में सूर्य के बिना धरती का वातावरण और सतह बेहद ठंडी हो जाएगी और अधिकांश जीवों के लिए परिस्थितियां अत्यंत कठिन हो जाएंगी।

एक आसान उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आप बहुत दूर किसी पहाड़ी पर किसी व्यक्ति को टॉर्च जलाते हुए देख रहे हैं। टॉर्च की रोशनी तुरंत आपकी आंखों तक नहीं पहुंचती। उसे आपके पास आने में थोड़ा समय लगता है।

सूरज के मामले में यही अंतर बहुत बड़ा है। सूरज करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है, इसलिए उसकी रोशनी को धरती तक पहुंचने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं।

इसलिए सूरज की रोशनी वास्तव में हमें थोड़ी देर पहले की सूचना देती है।

तो सीधा जवाब क्या है?

अगर सूरज अचानक गायब हो जाए, तो धरती पर करीब 8 मिनट 20 सेकंड तक सूर्य का प्रकाश दिखाई देता रहेगा। इसके बाद सूर्य की रोशनी धरती तक पहुंचना बंद हो जाएगी और अंधेरा छा जाएगा।

यानी सूरज को देखते समय हम हमेशा उसका लगभग 8 मिनट 20 सेकंड पुराना रूप देख रहे होते हैं। यही विशाल अंतरिक्ष दूरी और प्रकाश की सीमित गति का बेहद दिलचस्प परिणाम है।

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