*एफटीसी कोर्ट से दो सगे भाई सहित सात हत्यारोपी बरी*
*करीब सोलह साल पहले अयोध्या जिले के कुएं से लाश हुई थी बरामद*
*मुकदमेबाजी की पुरानी रंजिश में साजिशन हत्या का था आरोप,अभियोजन पक्ष घटना साबित कर पाने में रहा असफल*
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सुल्तानपुर। फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय स्वतंत्र प्रकाश की अदालत ने सोमवार को अमरपाल हत्याकांड में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में दो सगे भाई सहित सात हत्यारोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। एफटीसी कोर्ट के फैसले से हत्यारोपियों को बड़ी राहत मिली है।
बल्दीराय थाने के सतहरी गांव की रहने वाली राजपती ने 20 फरवरी साल 2010 को स्थानीय थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उनके आरोप के मुताबिक उनके पति अमरपाल के खिलाफ गांव के ही राधेश्याम यादव ने साल 2007 में जानलेवा हमले के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसका ट्रायल जिला न्यायालय में चल रहा था। वादिनी के मुताबिक गांव के दुर्गा प्रसाद उपाध्याय ने मुकदमे बाजी की रंजिश को लेकर अपनी भाभी ऊषा व ज्येष्ठ अभियोजन कार्यालय में तैनात तत्कालीन आरक्षी राम जगत तिवारी की मदद से साजिश रचकर आठ जनवरी साल 2010 को कोर्ट में पेशी के लिए गए होने के दौरान उनके पति अमरपाल का अपहरण कर लिया और उनकी हत्या कर दिया। अमरपाल का शव अयोध्या जिले के हैदरगंज थाने के घोंपा गांव स्थित एक कुएं से आठ दिन बाद बरामद किया गया था। मामले में पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर बल्दीराय थाने के सतहरी गांव निवासी आरोपी राधेश्याम यादव, उनके भाई राजेश यादव, सह आरोपी रामानंद यादव,दुर्गा प्रसाद उपाध्याय, पवन कुमार,सुक्खू एवं अयोध्या जिले के हैदरगंज थाने के घोंपा डुहिया निवासी आरोपी रामनाथ निषाद के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया था। मामले का ट्रायल एफटीसी द्वितीय की अदालत में चल रहा था। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्यों व गवाहों को पेश किया और आरोपियो को दोषी ठहराकर दण्डित किए जाने की मांग किया। वहीं आरोपी दुर्गा प्रसाद उपाध्याय की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संतोष पाण्डेय एवं अन्य आरोपियो की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता वीरेंद्र तिवारी,राजकुमार सिंह,हरिशंकर तिवारी, मो शमशाद अली ने अपने-अपने तर्को को प्रस्तुत कर आरोपियो को बेकसूर बताया। अदालत ने उभय पक्षों को सुनने के बाद सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया है।








