आजमगढ़ के चक्रपानपुर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन देने वाले परिवारों के करीब 110 लोग 2012 से कॉलेज में काम कर रहे थे, लेकिन 2025 में सुरक्षा व्यवस्था बदलने पर हटा दिए गए। प्रधानाचार्य का कहना है कि फाइल शासन को भेजी गई है।
आजमगढ़ के चक्रपानपुर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए अपनी जमीन देने वाले परिवार आज रोजगार के लिए भटक रहे हैं। कॉलेज बनते समय इन परिवारों से वादा किया गया था कि हर परिवार के एक सदस्य को कॉलेज में नौकरी मिलेगी। इसी वादे के तहत करीब 110 लोग 2012 से कॉलेज में काम कर रहे थे, लेकिन 2025 में उन्हें काम से हटा दिया गया।
प्रभावित लोगों का दर्द यह है कि जमीन चली गई, नौकरी भी छिन गई और अब उम्र भी ऐसी नहीं रही कि कहीं और नौकरी मिल सके। कई लोग 30-35 साल की उम्र में यहां काम पर लगे थे और अब 45-50 के करीब पहुंच चुके हैं।
कोलकाता की घटना के बाद बदली व्यवस्था
बताया गया कि कोलकाता की एक घटना के बाद राज्य स्तर पर निर्देश आया कि मेडिकल कॉलेजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूर्व सैनिकों को दी जाए। इसी बदलाव में सुरक्षा और दूसरे कामों में लगे भूमिदाता परिवारों के इन कर्मचारियों की सेवा खत्म कर दी गई।
प्रभावित लोगों की आपबीती
वीरेंद्र यादव ने 34 साल की उम्र में यहां काम शुरू किया था। उमेश कुमार 32 साल की उम्र में लगे थे। मनोज कुमार अब 38 साल के हैं। सुरेंद्र यादव समेत इन सभी का कहना है कि जमीन देते समय रोजगार का भरोसा दिया गया था, इसलिए उन्होंने कहीं और नौकरी की तलाश नहीं की।
- संस्थान: राजकीय मेडिकल कॉलेज, चक्रपानपुर, आजमगढ़
- प्रभावित: करीब 110 कर्मचारी, सभी भूमिदाता परिवारों से
- काम कब से: 2012
- हटाए गए: 2025, सुरक्षा व्यवस्था पूर्व सैनिकों को सौंपे जाने पर
शासन को भेजी गई फाइल
प्रभावित लोग जिले के पांच विधायकों, जिला अधिकारियों, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. बी.डी. सिंह का कहना है कि इन कर्मचारियों की फाइल शासन को भेज दी गई है और उम्मीद है कि जल्द उनकी बहाली हो जाएगी। आजमगढ़ के 23 सीएचसी पर सर्जन और एनेस्थेटिस्ट की भारी कमी भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।
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