बलिया के बहुचर्चित खाद्यान्न घोटाले में ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई, 20 साल पुराने मामले में वांछित कोटेदार जलेश्वर राम गिरफ्तार, 53.50 लाख रुपये की सरकारी क्षति से जुड़ा है मामला फर्जी मास्टर रोल बनाकर सरकारी खाद्यान्न के दुरुपयोग का आरोप, बलिया के 43 मुकदमों से जुड़े घोटाले में कोटेदार गिरफ्तार, ईओडब्ल्यू ने बांसडीह से दबोचा अभियुक्त जलेश्वर राम
बलिया
बहुचर्चित बलिया खाद्यान्न घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी है। करीब दो दशक पुराने इस मामले में लंबे समय से वांछित चल रहे कोटेदार जलेश्वर राम को ईओडब्ल्यू की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को 30 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 11 बजे जनपद बलिया के बांसडीह क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है। इस कार्रवाई से खाद्यान्न घोटाले से जुड़े पुराने मामलों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
ईओडब्ल्यू द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, उच्चाधिकारियों के कुशल निर्देशन एवं पर्यवेक्षण में वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत थाना दोकटी, जनपद बलिया में दर्ज मुकदमा संख्या 18/2006 से संबंधित वांछित अभियुक्त जलेश्वर राम को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी घटना के समय कोटेदार के पद पर कार्यरत था और उस पर सरकारी खाद्यान्न के दुरुपयोग में शामिल होने का आरोप है।
**क्या है पूरा खाद्यान्न घोटाला?**
दरअसल, वित्तीय वर्ष 2002 से 2005 के बीच केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना संचालित की जा रही थी। इस योजना के तहत बलिया जनपद के विकास खंड मुरलीछपरा के विभिन्न गांवों में नाली निर्माण, खड़ंजा निर्माण, पटरी मरम्मत, संपर्क मार्गों पर मिट्टी कार्य, सीसी रोड और पुलिया निर्माण जैसे विकास कार्य प्रस्तावित थे। इन कार्यों में लगाए गए मजदूरों को मेहनताना के रूप में खाद्यान्न यानी चावल और नकद धनराशि उपलब्ध कराई जानी थी।
आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन के दौरान संबंधित अभियुक्तों ने कथित तौर पर फर्जी मास्टर रोल तैयार किए। इन फर्जी दस्तावेजों में ऐसे श्रमिकों के नाम दर्ज किए गए, जो वास्तव में काम पर नहीं लगे थे। इसके आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में खाद्यान्न वितरण दर्शाया गया, जबकि वास्तविक मजदूरों को उनका निर्धारित खाद्यान्न और नकद भुगतान नहीं किया गया।
जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, वर्ष 2002 से 2005 के बीच इस पूरे मामले में करीब 53 लाख 50 हजार 75 रुपये की सरकारी क्षति पहुंचाई गई। ईओडब्ल्यू के अनुसार, विवेचना के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों में गिरफ्तार अभियुक्त के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाए गए हैं।
**43 मुकदमों से जुड़ा है मामला**
इस बहुचर्चित खाद्यान्न घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस प्रकरण में कुल 43 मुकदमे दर्ज किए गए थे। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही हैं। अब लंबे समय से फरार चल रहे कोटेदार जलेश्वर राम की गिरफ्तारी को इस मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान जलेश्वर राम पुत्र भगवान राम, निवासी ग्राम श्रीपतिपुर, थाना दोकटी, जनपद बलिया के रूप में हुई है। ईओडब्ल्यू टीम द्वारा आरोपी को माननीय न्यायालय विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट, आजमगढ़ के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके बाद न्यायालय के निर्देशानुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
करीब दो दशक पुराने इस मामले में हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों को चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे की जांच और न्यायिक कार्रवाई में क्या तथ्य सामने आते हैं।