नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना…
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन लेकर आए हैं।” उनके अनुसार, शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
डिंपल यादव ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है। उनका आरोप है कि सरकार जनता की आवाज़ सुनने के बजाय विरोध की आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील होती, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी मांग कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की थी। लगातार अनशन के चलते उनकी तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई। पुलिस का कहना है कि यह कदम डॉक्टरों की सलाह और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए उठाया गया।
हालांकि, वांगचुक के समर्थकों और कई विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध प्रदर्शन स्थल से हटाया गया। इस घटना के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया और सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया।
डिंपल यादव ने कहा कि सरकार को विरोध करने वालों के साथ टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय संवाद करना चाहिए। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए कहा कि असहमति को दबाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इससे पहले भी वह जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात कर चुकी थीं और उनके आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया था।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की घटना के बाद विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई का उद्देश्य उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराना था। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।