ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा किया जाना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सख्त रुख सामने आया है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई और आतंकवाद को किसी भी रूप में उचित न ठहराने की मांग करता रहा है। ऐसे में ब्रिक्स जैसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच से पहलगाम आतंकी हमले की निंदा होना भारत के पक्ष को मजबूत करता है।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने आतंकवाद के खिलाफ अपनी चिंता को मजबूती से रखा था। भारत का लगातार जोर रहा है कि आतंकवाद को लेकर दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए और आतंकवादियों तथा उन्हें समर्थन देने वाले तंत्र के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। ब्रिक्स घोषणापत्र में हमले की निंदा को इसी कूटनीतिक प्रयास का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ब्रिक्स में भारत के अलावा दुनिया की कई प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। संगठन के संयुक्त घोषणापत्र में आतंकवादी हिंसा की निंदा से यह संदेश जाता है कि आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। भारत के लिए यह अपने सुरक्षा हितों और आतंकवाद के खिलाफ नीति को अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाने की दिशा में अहम कदम है।
भारत की कूटनीति के लिहाज से यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली लगातार आतंकवाद के मुद्दे को वैश्विक मंचों पर प्रमुखता से उठाती रही है। भारत का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। पहलगाम हमले का जिक्र ब्रिक्स घोषणापत्र में होना भारत की इस रणनीति को मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी बहुपक्षीय संगठन के संयुक्त दस्तावेज में किसी आतंकी घटना का उल्लेख और उसकी निंदा होना संबंधित देश के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ माहौल बनाने में मदद मिलती है। साथ ही यह भी संकेत जाता है कि आतंकवाद जैसे मुद्दे पर सदस्य देश कम से कम उसके मूल स्वरूप और हिंसक गतिविधियों की निंदा करने के लिए साझा मंच पर साथ आ सकते हैं।
भारत के लिए यह सफलता ऐसे समय में आई है जब वह आतंकवाद के मुद्दे पर वैश्विक समर्थन को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पहलगाम हमले को लेकर भारत ने पहले भी विभिन्न देशों के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की और आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। BRICS घोषणापत्र में हमले की निंदा इस व्यापक कूटनीतिक अभियान की एक अहम उपलब्धि के तौर पर देखी जा रही है।
कुल मिलाकर, BRICS घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा भारत के लिए सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी कूटनीतिक मुहिम को मिली अहम मजबूती के रूप में देखी जा रही है। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात मजबूती से रखने और आतंकवाद के खिलाफ व्यापक वैश्विक सहमति बनाने में मदद मिल सकती है।








