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चित्रकूट में आज भी जीवंत है माता शबरी की भक्ति, जानें भगवान श्रीराम को बेर खिलाने की कथा

चित्रकूट में आज भी माता शबरी की अटूट भक्ति और भगवान श्रीराम के प्रति उनके प्रेम की कथा श्रद्धा के साथ याद की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सीता की खोज के दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मण माता शबरी की कुटिया पहुंचे थे।

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Pawan Kumar

2 मिनट चित्रकूट

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चित्रकूट में आज भी जीवंत है माता शबरी की भक्ति, जानें भगवान श्रीराम को बेर खिलाने की कथा
धर्मनगरी चित्रकूट को भगवान श्रीराम की तपोस्थली माना जाता है।

धर्मनगरी चित्रकूट को भगवान श्रीराम की तपोस्थली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का साढ़े ग्यारह वर्ष का समय चित्रकूट में बिताया था। यहां के जंगल, पहाड़ और धार्मिक स्थल रामायण की अनेक कथाओं से जुड़े हैं। इन्हीं में माता शबरी की भक्ति और भगवान श्रीराम को बेर खिलाने का प्रसंग विशेष महत्व रखता है।

प्रेम से खिलाए बेर, भक्ति से प्रसन्न हुए भगवान

लोकमान्यता के अनुसार, माता शबरी भगवान श्रीराम की परम भक्त थीं और लंबे समय से उनके दर्शन की प्रतीक्षा कर रही थीं। कथा के मुताबिक, जब भगवान श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण के साथ उनके आश्रम पहुंचे, तो शबरी भाव-विभोर हो गईं। उनके पास प्रभु को भेंट करने के लिए विशेष सामग्री नहीं थी, इसलिए उन्होंने बेर अर्पित किए। मान्यता है कि शबरी प्रत्येक बेर को चखकर देखती थीं कि वह मीठा है या नहीं, फिर मीठा बेर भगवान को देती थीं। भगवान श्रीराम ने उनके प्रेम और निष्कपट भक्ति को स्वीकार किया। यह प्रसंग आज भी श्रद्धालुओं के लिए सच्ची भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

**आदिवासी समाज की आस्था से जुड़ा शबरी आश्रम**

चित्रकूट के पाठा क्षेत्र और मानिकपुर स्थित शबरी आश्रम से आदिवासी समाज की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। आदिवासी समाज से आने वाले राजन कोल के अनुसार, माता शबरी की कथा पीढ़ियों से समाज में सुनाई जाती रही है। उन्होंने बताया कि शबरी आश्रम में लोग श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान श्रीराम तथा माता शबरी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

**मतंग ऋषि ने दिया था श्रीराम के दर्शन का भरोसा**

शबरी आश्रम के पुजारी अच्छे लाल के मुताबिक, माता शबरी ऋषि मतंग की शिष्या थीं। धार्मिक कथा के अनुसार, ऋषि मतंग ने उन्हें भगवान श्रीराम की प्रतीक्षा करते रहने और उनकी आराधना करने की प्रेरणा दी थी। मान्यता है कि इसी विश्वास के साथ शबरी ने प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा की और अंततः उन्हें दर्शन प्राप्त हुए।

मानिकपुर के शबरी आश्रम में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता शबरी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां आदिवासी समाज सहित विभिन्न समुदायों के श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। माता शबरी की कथा आज भी प्रेम, समानता, सेवा और अटूट विश्वास का संदेश देती है।

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