उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिसमें प्रदेश के बड़े शहरों में नई ई-बसों के संचालन की अनुमति दी गयी है. नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि प्रदेश के 17 नगर निगमों और नोएडा सहित कुल 18 बड़े शहरों में जीसीसी (ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट) मॉडल पर 1,725 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को मंजूरी दी गई है.
बड़े शहरों में वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी. नोएडा में इस सेवा का विस्तार जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक किया जाएग. सरकार का मानना है कि इससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी और प्रदूषण में कमी आएगी.इसके अलावा सरकारी अधिवक्ताओं की फीस और भत्तों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई.कैबिनेट के समक्ष रखे गए 25 प्रस्तावों में से 24 को स्वीकृति मिल गई, जबकि परिवहन विभाग से संबंधित एक प्रस्ताव को फिलहाल मंजूरी नहीं मिल सकी.कैबिनेट ने विकास प्राधिकरणों के दायरे में आने वाली ऐसी परियोजनाओं को भी मंजूरी दे दी है, जिन्हें 31 मार्च, 2026 तक जिला पंचायत द्वारा पास किया गया था.कैबिनेट ने इन सभी परियोजनाओं के विनियमितिकरण को मंजूरी दे दी है.विकास प्राधिकरण इन परियोजनाओं का विनियमितिकरण करेंगी। साथ ही आगे का नक्शा भी विकास प्राधिकरण पास करेंगी. दरअसल, प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्राधिकरणों का विस्तार हुआ है.जिसके चलते कई परियोजनाएं ऐसी थीं, जिन्हें जिला पंचायत ने मंजूरी दी थी.इस फैसले के बाद ऐसी परियोजनाएं रेग्युलराइज हो जाएंगी.कैबिनेट ने न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक प्रदेश सरकार की पैरवी करने वाले सरकारी अधिवक्ताओं के मानदेय और भत्तों में वृद्धि को हरी झंडी दी है.
जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत जिला न्यायालयों में तैनात सरकारी वकीलों को मिलने वाली मासिक रिटेनरशिप 9 हजार रुपए से बढ़ाकर 14 हजार रुपए कर दी गई है.प्रति सुनवाई फीस भी 1,650 रुपए से बढ़ाकर 2,500 रुपए कर दी गई है.
वहीं, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट एडवोकेट्स की रिटेनरशिप 7,200 रुपए से बढ़ाकर 11 हजार रुपए तथा प्रति सुनवाई फीस 1,500 रुपए से बढ़ाकर 2,300 रुपए कर दी गई है.प्रदेश के महाधिवक्ता को वर्तमान में मिलने वाली 75 हजार रुपए मासिक रिटेनरशिप बढ़ाकर 1.25 लाख रुपए किए जाने तथा प्रति सुनवाई फीस 40 हजार रुपए से बढ़ाकर 60 हजार रुपए किए जाने को भी मंजूरी दी गई है.








