नई दिल्ली: कभी सिर्फ खेती और ईंधन के लिए इस्तेमाल होने वाला गोबर (Cow Dung) अब भारत के लिए एक उभरता हुआ निर्यात (Export) उत्पाद बन चुका है। ऑर्गेनिक खेती, प्राकृतिक खाद, अगरबत्ती, बायो-फ्यूल और इको-फ्रेंडली उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग के चलते भारतीय गोबर…
नई दिल्ली: कभी सिर्फ खेती और ईंधन के लिए इस्तेमाल होने वाला गोबर (Cow Dung) अब भारत के लिए एक उभरता हुआ निर्यात (Export) उत्पाद बन चुका है। ऑर्गेनिक खेती, प्राकृतिक खाद, अगरबत्ती, बायो-फ्यूल और इको-फ्रेंडली उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग के चलते भारतीय गोबर और उससे बने उत्पादों की मांग कई देशों में तेजी से बढ़ रही है।
किन देशों को निर्यात होता है भारतीय गोबर?
निर्यात आंकड़ों के अनुसार, भारत से गोबर और गोबर आधारित उत्पाद 30 से अधिक देशों में भेजे जा रहे हैं। प्रमुख आयातक देशों में शामिल हैं—
- मालदीव
- अमेरिका
- सिंगापुर
- इटली
- फ्रांस
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- कुवैत
- सऊदी अरब
- ऑस्ट्रेलिया
- बांग्लादेश
- श्रीलंका
इन देशों में भारतीय गोबर का उपयोग मुख्य रूप से ऑर्गेनिक खेती, खाद, बायोगैस, धूप-अगरबत्ती, धार्मिक कार्यों और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
भारत हर महीने कितना कमाता है?
उद्योग से जुड़े हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत से गोबर और गोबर आधारित उत्पादों का वार्षिक निर्यात करीब ₹400 करोड़ के आसपास पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि औसतन हर महीने लगभग ₹33 करोड़ का निर्यात होता है। यह आंकड़ा मांग और निर्यात ऑर्डर के अनुसार घट-बढ़ सकता है।
क्या-क्या निर्यात किया जाता है?
भारत केवल कच्चा गोबर ही नहीं, बल्कि उससे बने कई मूल्यवर्धित (Value-added) उत्पाद भी विदेश भेजता है, जैसे—
- ऑर्गेनिक खाद (Organic Manure)
- गोबर पाउडर
- गोबर के उपले (Dung Cakes)
- वर्मी कम्पोस्ट
- गोबर से बनी अगरबत्ती
- बायो-फर्टिलाइजर और अन्य जैविक उत्पाद
इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है क्योंकि इन्हें रासायनिक उर्वरकों के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में देखा जाता है।
विदेशों में भारतीय गोबर की मांग क्यों बढ़ रही है?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय गोबर में प्राकृतिक सूक्ष्मजीव (Microbes) और जैविक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। यही वजह है कि इसका उपयोग—
- ऑर्गेनिक खेती
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने
- बायोगैस उत्पादन
- इको-फ्रेंडली उत्पाद बनाने
- धार्मिक और पारंपरिक उपयोग
के लिए किया जा रहा है। खासकर खाड़ी देशों में खजूर की खेती और यूरोप में ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए इसकी मांग बढ़ी है।
भारत को क्या फायदा हो रहा है?
गोबर के निर्यात से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और छोटे उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर पैदा हुए हैं। पहले जिसे अनुपयोगी अपशिष्ट माना जाता था, वही अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और टिकाऊ (Sustainable) कृषि को बढ़ावा देने का माध्यम बन रहा है।
निष्कर्ष
भारत आज दुनिया के कई देशों को गोबर और उससे बने उत्पाद निर्यात कर रहा है। अनुमानतः 30 से अधिक देशों में इसकी आपूर्ति हो रही है और करीब ₹400 करोड़ सालाना (औसतन ₹33 करोड़ प्रति माह) का निर्यात कारोबार हो चुका है। ऑर्गेनिक खेती और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग के साथ आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।