FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन कर दिया है। इस समिति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले को भी शामिल किया गया है। समिति की अध्यक्षता बीजेपी सांसद संजय जायसवाल…
FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन कर दिया है। इस समिति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले को भी शामिल किया गया है। समिति की अध्यक्षता बीजेपी सांसद संजय जायसवाल करेंगे।
सुप्रिया सुले की JPC में नियुक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि वह पहले ही FCRA बिल के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठा चुकी हैं। उन्होंने सरकार से बिल को वापस लेने या फिर इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजकर सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तार से चर्चा कराने की मांग की थी।
31 सदस्यीय समिति में विपक्ष की भी मौजूदगी
FCRA बिल की जांच के लिए बनाई गई समिति में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसद शामिल हैं। लोकसभा से सुप्रिया सुले के अलावा ए. राजा, कल्याण बनर्जी, जिया उर रहमान और कई अन्य विपक्षी सांसदों को जगह मिली है। समिति में बीजेपी सबसे बड़ा दल है, जबकि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का भी प्रतिनिधित्व है।
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act देश में विदेशी चंदे और विदेशी योगदान को नियंत्रित करने वाला कानून है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य विदेशी योगदान के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है। हालांकि, विपक्ष और कुछ संगठनों ने बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता जताई है।
सुले ने पहले क्या कहा था?
सुप्रिया सुले ने अगस्त में कहा था कि हर विदेशी फंडिंग को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि अगर विदेशी धन का इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य वैध सामाजिक कार्यों के लिए हो रहा है, तो उस पर अनावश्यक रोक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा था कि गलत गतिविधियों से जुड़ी फंडिंग पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अब JPC में शामिल होने के बाद सुले को बिल की विस्तृत जांच और उस पर होने वाली चर्चाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। समिति अपनी समीक्षा के बाद संसद में रिपोर्ट पेश करेगी, जिसके आधार पर बिल के अंतिम स्वरूप पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।