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गाजियाबाद में महंगा हो सकता है घर-जमीन खरीदना, सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी

गाजियाबाद में घर और जमीन खरीदना जल्द महंगा हो सकता है। प्रशासन इस साल सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी कर रहा है और स्टांप विभाग ने संपत्तियों का सर्वे शुरू कर दिया है। प्लॉट और फ्लैट के नए सर्किल रेट प्रस्तावित किए जाएंगे, जिससे रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क का खर्च बढ़ सकता है।

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Pawan Kumar

2 मिनट गाजियाबाद

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गाजियाबाद में महंगा हो सकता है घर-जमीन खरीदना, सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी

अगर आप गाजियाबाद में घर, प्लॉट या जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आने वाले दिनों में आपका बजट बढ़ सकता है। जिला प्रशासन संपत्तियों के **सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी** कर रहा है। डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर जमीन और संपत्तियों का सर्वे कराने और नई दरों का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

इन इलाकों में बढ़ सकता है प्रॉपर्टी का खर्च

प्रशासन की कवायद का असर इंदिरापुरम, कौशांबी, वेव सिटी, सन सिटी, आदित्य वर्ल्ड सिटी और राजनगर एक्सटेंशन जैसे इलाकों पर पड़ सकता है। स्टांप विभाग की ओर से जमीन और संपत्तियों का सर्वे कराया जा रहा है। एआईजी स्टांप प्रेम प्रकाश सिंह के मुताबिक, सर्वे के आधार पर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और इसे जिलाधिकारी के सामने रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद नई दरें लागू की जा सकती हैं।

रजिस्ट्री का खर्च बढ़ेगा

सर्किल रेट बढ़ने का सीधा असर संपत्ति की रजिस्ट्री पर पड़ सकता है। इससे स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन से जुड़ा खर्च बढ़ सकता है। खासतौर पर पहली बार घर खरीदने वाले लोगों को अधिक बजट रखना पड़ सकता है। वहीं, रियल एस्टेट कारोबारियों का मानना है कि कीमतों में बढ़ोतरी से कुछ खरीदार अपने सौदे टाल सकते हैं, जिसका असर बाजार की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

पिछली बार 15 से 20 फीसदी बढ़े थे रेट

गाजियाबाद में सितंबर 2025 के अंत में सर्किल रेट में बदलाव किया गया था। उस समय आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की दरों में करीब **15 से 20 फीसदी** तक बढ़ोतरी हुई थी। आदित्य वर्ल्ड सिटी और वेव सिटी जैसे क्षेत्रों में कुछ दरों में 20 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं कृषि भूमि के सर्किल रेट में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी।

अब नए सर्वे और प्रस्ताव की प्रक्रिया के बाद प्रशासन नई दरों पर फैसला करेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नई दरों में कितनी बढ़ोतरी होगी और इन्हें किस तारीख से लागू किया जाएगा।

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