अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर भारतीय पेशेवरों और अमेरिका में काम करने की तैयारी कर रहे लोगों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने की आशंका है। ट्रंप प्रशासन की ओर से H-1B वीजा से जुड़ी फीस में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव सामने आने के बाद इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई…
अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर भारतीय पेशेवरों और अमेरिका में काम करने की तैयारी कर रहे लोगों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने की आशंका है। ट्रंप प्रशासन की ओर से H-1B वीजा से जुड़ी फीस में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव सामने आने के बाद इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि प्रस्ताव लागू होता है तो इसका सीधा असर उन कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं।
विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में इस पूरे मामले पर अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि इससे पहले ट्रंप प्रशासन की ओर से H-1B वीजा के लिए 1 लाख डॉलर की फीस लगाए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, अमेरिकी अदालत में इस फैसले को चुनौती दी गई और एक जज ने इसे खारिज कर दिया था।
अब एक बार फिर ट्रंप प्रशासन की ओर से नई गणना के आधार पर 1 लाख 3 हजार 265 डॉलर की फीस प्रस्तावित किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह प्रस्ताव अभी लागू नहीं हुआ है।
अभी सिर्फ प्रस्ताव, लागू होना बाकी
रोबिंदर सचदेव के मुताबिक फिलहाल नई फीस को लागू नहीं किया गया है, बल्कि इसका प्रस्ताव रखा गया है। ऐसे में इसके अंतिम रूप और कानूनी स्थिति को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।
उन्होंने संभावना जताई कि अगर इसे लागू किया जाता है तो इसे अमेरिकी अदालत में चुनौती दी जा सकती है। उनके मुताबिक इस तरह की फीस को लेकर पहले भी कानूनी सवाल उठ चुके हैं और इस बार भी मामला कोर्ट तक पहुंच सकता है।
सचदेव ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी बड़ी फीस को टैक्स की तरह देखा जा सकता है और इसे लागू करने के अधिकार को लेकर भी कानूनी बहस हो सकती है। उनके अनुसार टैक्स लगाने का अधिकार अमेरिकी कांग्रेस के पास है, इसलिए राष्ट्रपति के स्तर पर इस तरह की कार्रवाई को अदालत में चुनौती मिलने की संभावना बनी रहेगी।
ट्रंप प्रशासन लागू करने की कोशिश करेगा
हालांकि, विशेषज्ञ का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव को लागू कराने की पूरी कोशिश कर सकते हैं। ट्रंप प्रशासन पहले से ही इमिग्रेशन और विदेशी कर्मचारियों से जुड़े नियमों को सख्त करने की दिशा में कदम उठाता रहा है।
अगर इतनी बड़ी फीस वास्तव में लागू होती है तो इसका असर केवल वीजा आवेदकों पर ही नहीं बल्कि उन अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जो विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीजा के माध्यम से नियुक्त करती हैं। खासतौर पर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
भारतीयों के लिए क्यों अहम है H-1B वीजा?
H-1B वीजा भारतीय पेशेवरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बड़ी संख्या में भारतीय आईटी प्रोफेशनल, इंजीनियर और दूसरे विशेषज्ञ इस वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी करते हैं।
इसी वजह से अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव भारतीयों पर खास असर डाल सकता है। यदि नियोक्ताओं पर वीजा से जुड़ी लागत बहुत अधिक बढ़ती है तो कंपनियां नए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के फैसले पर दोबारा विचार कर सकती हैं।
इसके अलावा अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे भारतीय युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए भी यह अनिश्चितता बढ़ाने वाला कदम हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP ने भी जताई चिंता
H-1B वीजा से जुड़े बदलावों को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब तक डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में हैं, तब तक इस तरह की नीतियां सामने आती रह सकती हैं।
उन्होंने मौजूदा स्थिति को भारत के लिए अप्रिय बताया और कहा कि H-1B वीजा के जरिए अमेरिका जाने वालों में बड़ी संख्या भारतीयों की है। ऐसे में किसी भी सख्त नीति का सबसे ज्यादा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ सकता है।
शेष पॉल वैद के मुताबिक भारत को फिलहाल कुछ समय तक इस स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के मौजूदा रुख को भारत के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं माना और कहा कि अगले राष्ट्रपति चुनाव तक इंतजार करना पड़ सकता है।
वीजा अपॉइंटमेंट को लेकर भी बदलाव
H-1B वीजा फीस के प्रस्ताव के अलावा अमेरिकी वीजा प्रक्रिया में भी बदलाव की खबर सामने आई है। ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति के तहत दुनियाभर में वीजा अपॉइंटमेंट को लेकर अस्थायी बदलाव किए जा रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक दुनिया भर के अमेरिकी दूतावासों में कर्मचारियों के लिए एक ट्रेनिंग शुरू की गई है। इस ट्रेनिंग के चलते कुछ वीजा सेवाओं के अपॉइंटमेंट में बदलाव किया जाएगा।
अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान वीजा सेवाओं से जुड़े अपॉइंटमेंट प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इसे स्थायी रूप से वीजा सेवाओं को बंद करने के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स की बढ़ी चिंता
H-1B वीजा में प्रस्तावित भारी फीस और वीजा अपॉइंटमेंट में बदलाव की खबरों के बाद अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों और पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, अभी प्रस्तावित फीस के अंतिम रूप और उसके लागू होने को लेकर कानूनी प्रक्रिया बाकी है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आवेदकों और कंपनियों को अंतिम सरकारी आदेश और अमेरिकी अदालतों के फैसले का इंतजार करना चाहिए। जब तक प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर लागू नहीं होता, तब तक इसे अंतिम नियम मानना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल क्या समझें?
- H-1B वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर फीस का प्रस्ताव चर्चा में है।
- यह फीस अभी लागू नहीं हुई है।
- प्रस्ताव को अमेरिकी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
- H-1B वीजा पर किसी भी सख्त फैसले का भारतीय प्रोफेशनल्स पर बड़ा असर पड़ सकता है।
- अमेरिकी दूतावासों में ट्रेनिंग के चलते वीजा अपॉइंटमेंट में भी अस्थायी बदलाव किए जा रहे हैं।
- अंतिम स्थिति अमेरिकी प्रशासन के फैसले और संभावित कानूनी चुनौती के बाद ही स्पष्ट होगी।