हरदोई जिले के 1075 स्कूली वाहनों में से सिर्फ 241 में महिला परिचारक तैनात हैं। 834 वाहन बिना महिला परिचारक के बच्चों को ढो रहे हैं। निर्देश के बावजूद सिर्फ करीब 22 फीसदी वाहन ही नियम का पालन कर रहे हैं।
हरदोई। स्कूली बच्चों, खासकर छात्राओं की सुरक्षा के लिए स्कूल वाहनों में महिला परिचारक (अटेंडेंट) रखने का निर्देश जिले में कागज़ों तक सिमटा है। जिले के 1075 स्कूली वाहनों में से सिर्फ 241 में ही महिला परिचारक तैनात हैं।
834 वाहन बिना महिला परिचारक
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 834 स्कूली वाहन बिना महिला परिचारक के बच्चों को स्कूल ला-ले जा रहे हैं। यानी सिर्फ करीब 22 फीसदी वाहन ही नियम का पालन कर रहे हैं।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि निर्देश के बावजूद 834 वाहनों में महिला परिचारक नहीं हैं।
स्कूलों ने नहीं भेजी रिपोर्ट
परिवहन विभाग ने स्कूल संचालकों से वाहनों में महिला परिचारक की तैनाती की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब तक सिर्फ 241 वाहनों के दस्तावेज़ ही जमा हुए हैं। बाकी स्कूलों ने जानकारी नहीं दी है।
क्यों ज़रूरी है महिला परिचारक
स्कूल वाहनों में छोटे बच्चे और छात्राएं सफर करते हैं। महिला परिचारक बच्चों को सुरक्षित चढ़ाने-उतारने, रास्ते में उनकी देखभाल करने और किसी भी अनहोनी से बचाने में अहम भूमिका निभाती है।
अभिभावक ध्यान दें: अपने बच्चे के स्कूल वाहन में महिला परिचारक है या नहीं, यह स्कूल प्रबंधन से ज़रूर पूछें। वाहन का फिटनेस, परमिट और चालक का लाइसेंस भी जांच सकते हैं।
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