Indira Ekadashi 2026: पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी आज, जानें पारण समय, पूजा विधि और व्रत कथा
पितृ पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का व्रत आज 6 अक्टूबर को रखा जा रहा है। व्रत का पारण 7 अक्टूबर की सुबह 6:17 से 8:38 बजे तक होगा। जानिए एकादशी श्राद्ध का कुतुप मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और नियम।
इंदिरा एकादशी 2026: पितृ पक्ष में नदी तट पर तर्पण करते श्रद्धालु — प्रतीकात्मक फोटो: Goutam1962 / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
Indira Ekadashi 2026: पितृ पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का व्रत आज, 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रखा जा रहा है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को पितरों की शांति और मोक्ष से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए श्राद्ध पक्ष में इसका विशेष महत्व माना जाता है। आज ही एकादशी तिथि का श्राद्ध भी किया जाएगा।
इंदिरा एकादशी 2026 तिथि और समय
पंचांग के अनुसार आश्विन कृष्ण एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को देर रात 2:07 बजे शुरू हुई और 7 अक्टूबर को देर रात 12:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत आज 6 अक्टूबर को ही रखा जा रहा है, इसलिए 6 या 7 अक्टूबर को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।
पारण का समय: 7 अक्टूबर, बुधवार सुबह 6:17 से 8:38 बजे तक (नई दिल्ली)
एकादशी श्राद्ध के शुभ मुहूर्त
जिन पूर्वजों का देहांत किसी भी मास की एकादशी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध आज किया जाता है। श्राद्ध और तर्पण के लिए दोपहर का समय श्रेष्ठ माना गया है।
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 बजे तक
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:33 से 1:20 बजे तक
अपराह्न काल: दोपहर 1:20 से 3:40 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त (पूजा के लिए): सुबह 4:39 से 5:28 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त (दीपदान के लिए): शाम 6:01 से 6:26 बजे तक
पितृ पक्ष में इंदिरा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने और इसका पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें शांति मिलती है और मोक्ष का मार्ग खुलता है। यही कारण है कि इसे पितृ पक्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की पूजा का विधान है।
इंदिरा एकादशी पूजा विधि
सुबह जल्दी स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
घर के मंदिर में भगवान विष्णु या शालिग्राम को गंगाजल से स्नान कराएं।
पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, धूप-दीप और फल-मिठाई अर्पित करें।
विष्णु सहस्रनाम या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और इंदिरा एकादशी की कथा सुनें।
दोपहर में कुतुप मुहूर्त में पितरों का तर्पण और श्राद्ध करें।
शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं और अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण करें।
इंदिरा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में महिष्मती नगरी में इंद्रसेन नाम के धर्मात्मा राजा राज करते थे। एक दिन देवर्षि नारद उनके दरबार में पहुंचे और बताया कि उनके पिता अपने किसी पूर्व जन्म के व्रत भंग के कारण यमलोक में हैं। नारद जी ने राजा को आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने और उसका पुण्य पिता को अर्पित करने का उपाय बताया। राजा इंद्रसेन ने परिवार सहित यह व्रत किया, जिसके प्रभाव से उनके पिता को स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई। तभी से इस एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है।
इंदिरा एकादशी पर क्या करें और क्या न करें
एकादशी के दिन चावल का सेवन न करें।
तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज और नशे से दूर रहें।
किसी से कटु वचन न बोलें और क्रोध न करें।
ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और गाय को भोजन व दान दें।
पारण अगले दिन तय समय के भीतर ही करें, हरि वासर समाप्त होने के बाद।
पितृ पक्ष 2026 कब खत्म होगा
पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 27 सितंबर को हुई थी और इसका समापन 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्व पितृ अमावस्या के साथ होगा। अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे से 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे तक रहेगी। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध सर्व पितृ अमावस्या पर किया जाता है।
नोट: पारण और मुहूर्त का समय नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित है। अलग-अलग शहरों में इसमें कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, अपने क्षेत्र के पंडित या पंचांग से भी समय की पुष्टि कर लें।