लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान में 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह मनाया गया। समापन कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों ने वन्यजीव संरक्षण, घटते प्राकृतिक आवास और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों पर जोर दिया। इस दौरान बच्चों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया। साथ ही चित्रकला प्रतियोगिता, नेचर वॉक, वन्यजीव वार्ता और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने कहा कि
विकास कार्यों के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास लगातार कम हो रहे हैं। उन्होंने बाघ संरक्षण को पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा से जोड़ते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की जरूरत बताई। वहीं, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा बेमूरी ने जंगलों पर अतिक्रमण को संघर्ष की प्रमुख वजहों में शामिल बताते हुए अधिक से अधिक पेड़ लगाने और वन क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया।
चिड़ियाघर के निदेशक संजय कुमार बिस्वाल ने बताया कि 1921 में शुरू हुआ यह प्राणी उद्यान केवल वन्यजीवों को देखने की जगह नहीं, बल्कि जागरूकता और शिक्षा का केंद्र भी है। यहां एक हजार से अधिक वन्यजीव हैं। उन्होंने बारहसिंगा के सफल प्रजनन, गिद्ध संरक्षण परियोजना और नए पशु चिकित्सालय को संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में बाघों पर फिल्में बनाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सुब्बैया नल्ला मुत्थू भी मौजूद रहे। इस अवसर पर वन्यजीव संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया गया।








