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पितृ पक्ष में पितरों की शांति के लिए करें इन मंत्रों और स्तोत्र का पाठ

पितृ पक्ष में पितरों की शांति और सद्गति की कामना के लिए पितृ गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और पितृ स्तोत्र का पाठ करने की धार्मिक मान्यता है। श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए पाठ को पितरों के प्रति सम्मान और स्मरण का माध्यम माना जाता है।

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Pawan Kumar

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पितृ पक्ष में पितरों की शांति के लिए करें इन मंत्रों और स्तोत्र का पाठ
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**पितृ पक्ष में पितरों की शांति के लिए करें इन मंत्रों और स्तोत्र का पाठ**

पितृ पक्ष में लोग अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान पितरों के निमित्त मंत्रों का जाप और स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों का स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट होती है। हालांकि, इनसे पितृ दोष कम होने या पितरों की कृपा मिलने जैसी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

 1. पितृ गायत्री मंत्र

पितृ पक्ष में श्रद्धालु पितरों का स्मरण करते हुए इन मंत्रों का जाप करते हैं—

ॐ पितृगणाय विद्महे जगतप्रियाय धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात्।

एक अन्य मंत्र के रूप में यह श्लोक भी पढ़ा जाता है—

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।**

 2. पितृ स्तोत्र

पितरों की आराधना के लिए पितृ स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है। इसकी शुरुआत इस श्लोक से होती है—

**अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।**

इसके अलावा स्तोत्र में देवर्षियों, सप्तर्षियों, मनुओं, सूर्य-चंद्रमा और विभिन्न पितृगणों को नमन किया गया है। धार्मिक परंपरा में इसे पितरों के स्मरण और श्रद्धा से जोड़ा जाता है।

3. पितरों के देव अर्यमा का मंत्र  

हिंदू धार्मिक परंपरा में अर्यमा को पितरों से संबंधित देवता माना जाता है। तर्पण के दौरान उनके स्मरण के लिए यह मंत्र पढ़ा जाता है—

**ॐ अर्यमा नः त्रिप्यताम् इदं तिलोदकं तस्मै स्वधा नमः।
ॐ मृत्योर्मा अमृतं गमय॥**

पितृ पक्ष में मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ श्रद्धा और परंपरा के अनुसार किया जाता है। तर्पण, श्राद्ध या पिंडदान जैसी विधियां परिवार की परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

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