भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सोशल मीडिया और डिजिटल निवेश सलाहकारों को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किया है। नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 5 लाख या उससे अधिक फॉलोअर्स हैं, तो उन्हें…
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सोशल मीडिया और डिजिटल निवेश सलाहकारों को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किया है। नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 5 लाख या उससे अधिक फॉलोअर्स हैं, तो उन्हें ‘सेलिब्रिटी’ की श्रेणी में रखा जा सकता है। यह कदम खासतौर पर उन इन्फ्लुएंसर्स और फाइनेंशियल कंटेंट क्रिएटर्स को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है जो निवेश, शेयर बाजार और वित्तीय सलाह से जुड़े कंटेंट पोस्ट करते हैं।
SEBI का मानना है कि सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ते फाइनेंस इन्फ्लुएंसर्स निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन कई बार उनके पास आवश्यक योग्यताएं या नियामकीय अनुमति नहीं होती। ऐसे में गलत या अधूरी जानकारी के कारण आम निवेशकों को नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।
नए नियमों का उद्देश्य क्या है?
SEBI के प्रस्तावित ड्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य निवेश सलाह देने वाले डिजिटल क्रिएटर्स को एक स्पष्ट दायरे में लाना है। यदि कोई व्यक्ति बड़ी संख्या में फॉलोअर्स रखता है, तो उसकी बातों का असर लाखों लोगों पर पड़ सकता है। इसलिए SEBI चाहता है कि ऐसे प्रभावशाली लोगों की जिम्मेदारी भी तय हो।
इस प्रस्ताव के तहत यह भी देखा जाएगा कि कौन व्यक्ति निवेश सलाह दे सकता है, कौन केवल शैक्षणिक कंटेंट साझा कर सकता है और किसे पंजीकरण की आवश्यकता होगी।
‘सेलिब्रिटी’ कैटेगरी का मतलब
नए नियमों के अनुसार, 5 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले डिजिटल क्रिएटर्स को विज्ञापन और निवेश प्रचार के मामलों में सेलिब्रिटी जैसी जिम्मेदारियों के तहत लाया जा सकता है। इसका अर्थ यह होगा कि वे किसी भी वित्तीय उत्पाद का प्रचार करते समय अधिक पारदर्शिता और डिस्क्लोजर नियमों का पालन करेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम उन मामलों पर रोक लगा सकता है जहां बड़े इन्फ्लुएंसर्स बिना पर्याप्त जानकारी के शेयर या क्रिप्टो जैसे निवेश विकल्पों को प्रमोट करते हैं।
सोशल मीडिया इकोसिस्टम पर असर
इस ड्राफ्ट का असर भारत के तेजी से बढ़ते फिनफ्लुएंसर (financial influencer) इकोसिस्टम पर भी देखने को मिल सकता है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स (Twitter) पर सक्रिय हजारों क्रिएटर्स को अब अपने कंटेंट को अधिक जिम्मेदारी के साथ पेश करना होगा।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गलत निवेश सलाह पर रोक लगेगी, वहीं कुछ क्रिएटर्स का कहना है कि इससे छोटे कंटेंट क्रिएटर्स पर अनावश्यक दबाव बढ़ सकता है।
आगे की प्रक्रिया
यह अभी एक ड्राफ्ट प्रस्ताव है, जिस पर उद्योग जगत, एक्सपर्ट्स और आम जनता से सुझाव लिए जाएंगे। सभी फीडबैक के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, SEBI का यह कदम डिजिटल युग में निवेश सलाह और सोशल मीडिया प्रभाव को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अगर यह नियम लागू होता है, तो भारत में फाइनेंशियल कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में पारदर्शिता और जवाबदेही और बढ़ सकती है।