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श्राद्ध पक्ष में चींटियों को दाना, पितरों के नाम पुण्य की अनोखी परंपरा

श्राद्ध पक्ष में पितरों की स्मृति और पुण्य के लिए चींटियों को दाना खिलाने की परंपरा निभाई जाती है। इसे सेवा, दया और पितरों के नाम पुण्य से जुड़ी धार्मिक मान्यता माना जाता है।

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Pawan Kumar

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श्राद्ध पक्ष में चींटियों को दाना, पितरों के नाम पुण्य की अनोखी परंपरा
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**श्राद्ध पक्ष में चींटियों को दाना, पितरों के नाम पुण्य की अनोखी परंपरा**

राजस्थान के जालोर जिले के निम्बावास गांव में श्राद्ध पक्ष के दौरान आस्था और जीवदया से जुड़ी एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। यहां स्थित कीड़ी नगरा में श्रद्धालु चींटियों को आटा, शक्कर और अनाज अर्पित करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, चींटियों समेत छोटे जीवों को अन्न खिलाना पुण्य का काम माना जाता है और इसे पितरों के निमित्त किए जाने वाले दान से जोड़कर देखा जाता है।

भीनमाल से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित कीड़ी नगरा लगभग 150 बीघा क्षेत्र में फैला बताया जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां बड़ी संख्या में चींटियां प्राकृतिक रूप से रहती हैं और उनका आकार सामान्य चींटियों से बड़ा बताया जाता है। अमावस्या और पूर्णिमा के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रहती है और मेले जैसा माहौल बन जाता है। जालोर, सिरोही और पाली के अलावा गुजरात से भी लोग यहां पहुंचते हैं।

श्राद्ध पक्ष में पितरों का स्मरण करते हुए लोग तर्पण, पूजा और दान-पुण्य करते हैं। इसी दौरान कीड़ी नगरा में चींटियों के लिए खाद्य सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जीवों को भोजन कराना सेवा और दया की भावना से जुड़ा है। हालांकि, पितरों के नाम चींटियों को अन्न देने से पुण्य मिलने की बात स्थानीय धार्मिक आस्था और मान्यता** है। निम्बावास का कीड़ी नगरा इसी परंपरा के चलते क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है।

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