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SIR पर बयान देकर घिरे कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली का यू-टर्न, बोले- मीडिया ने बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया

SIR पर बयान देकर घिरे कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली का यू-टर्न! पहले SIR को बताया सही, अब बोले- मीडिया ने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया, राहुल गांधी और डीके शिवकुमार के साथ खड़े होने का किया दावा—आखिर मंत्री ने क्यों बदला अपना रुख?

Pawan Kumar

• रिपोर्टर व न्यूज़ संपादक

4 मिनट lucknow

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SIR पर बयान देकर घिरे कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली का यू-टर्न, बोले- मीडिया ने बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया

Karnataka SIR Controversy: कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दिए गए बयान के बाद विवादों में आए राज्य के PWD मंत्री सतीश जारकीहोली ने अब सफाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी कर कहा कि उनके बयान को मीडिया ने तोड़-मरोड़कर पेश किया। मंत्री ने दावा किया कि दूसरे राज्यों में फॉर्म-7 के जरिए कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाने की साजिश हुई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार जिस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, उसमें वे भी उनके साथ हैं।

मंत्री के इस नए बयान को उनके पहले दिए गए बयान से अलग रुख के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले उन्होंने SIR प्रक्रिया को सही बताते हुए कहा था कि ऐसी प्रक्रिया पूरे देश में अपनाई जानी चाहिए। उनके पुराने बयान के बाद कांग्रेस के भीतर भी सवाल उठे थे।

पहले SIR प्रक्रिया को बताया था सही

सतीश जारकीहोली ने अपने पहले बयान में कहा था कि कर्नाटक में SIR के तहत वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब एक करोड़ नामों को लेकर प्रक्रिया सही थी। उनके मुताबिक, जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जो दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हो गए हैं या जिनके नाम मतदाता सूची में दोहराए गए हैं, उन्हें सूची में बनाए रखना उचित नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा था कि कर्नाटक में जिस तरह SIR की प्रक्रिया अपनाई गई, वैसी ही प्रक्रिया पूरे देश में लागू की जानी चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई थी, क्योंकि विपक्षी दल लगातार SIR और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

अब बोले- मीडिया ने बयान को गलत तरीके से पेश किया

अब X पर वीडियो जारी कर मंत्री ने अपने बयान का स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सवालों का जवाब देते समय उन्होंने दूसरे राज्यों में फॉर्म-7 के इस्तेमाल से कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित करने के आरोपों का जिक्र किया था।

जारकीहोली के मुताबिक, राहुल गांधी इस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी बेलगावी में फॉर्म-7 के जरिए कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों को जनता के सामने रखा है। मंत्री ने कहा कि वे भी इस मामले में पार्टी के नेताओं के साथ हैं।

अपने विधानसभा क्षेत्र में 13 हजार वोट कटने का दावा

सतीश जारकीहोली ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में करीब 13 हजार मतदाताओं के नाम कटे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज किए हैं और जांच चल रही है।

मंत्री के अनुसार, फाइनल वोटर लिस्ट का अध्ययन करने के बाद यह पता लगाया जाएगा कि हटाए गए मतदाता वास्तव में अपने पते से स्थानांतरित हो चुके हैं या उनके नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पूरी जानकारी और सच्चाई जल्द जनता के सामने रखेंगे।

प्रियांक खरगे ने पहले उठाए थे सवाल

सतीश जारकीहोली के शुरुआती बयान पर कांग्रेस नेता और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि जारकीहोली किस आधार पर ऐसी बातें कह रहे हैं। प्रियांक ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें जमीनी स्थिति की पूरी जानकारी नहीं है।

प्रियांक खरगे ने चित्तापुर के एक बूथ पर एक ही समुदाय के 40 लोगों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने विजयपुरा का उदाहरण देते हुए कहा था कि 50 से अधिक लोगों को मृत घोषित कर उनके नाम पर फॉर्म-7 जमा किए गए, जबकि बाद में पता चला कि वे सभी जीवित थे। प्रियांक ने स्पष्ट किया था कि वे जो आरोप लगा रहे हैं, वे उनके मुताबिक उपलब्ध सबूतों पर आधारित हैं।

SIR और फॉर्म-7 को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

कर्नाटक में SIR और फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग बयानों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक तरफ सतीश जारकीहोली ने पहले SIR प्रक्रिया का समर्थन किया था, वहीं अब उन्होंने फॉर्म-7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फॉर्म-7 मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने के लिए दावा या आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया का हिस्सा है। किसी नाम को हटाने की मांग और नाम हटाए जाने की अंतिम कार्रवाई अलग-अलग चरण हैं। इसलिए लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच और संबंधित चुनावी रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।

दिल्ली में भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर दो कार्यक्रम

इसी बीच शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर दो अलग-अलग कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। विपक्षी इंडिया ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े सवालों को लेकर पब्लिक इंपीचमेंट कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है।

वहीं, सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी नाम का संगठन भी लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसके लिए संसद जैसी संरचना तैयार की गई है। ऐसे में कर्नाटक में SIR और फॉर्म-7 को लेकर जारी विवाद के बीच दिल्ली के ये कार्यक्रम भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

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