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सुप्रीम कोर्ट की NCLT-NCLAT पर तीखी टिप्पणी, कहा- कॉर्पोरेट मंत्रालय ने पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया

सुप्रीम कोर्ट की NCLT-NCLAT पर बड़ी टिप्पणी! CJI सूर्यकांत बोले- कॉर्पोरेट मंत्रालय ने पूरी तरह कब्जे में ले लिया, न्यायिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर उठाए सवाल; अब संविदा कर्मचारियों की नौकरी और नियुक्तियों पर क्या होगा फैसला?

Pawan Kumar

• रिपोर्टर व न्यूज़ संपादक

4 मिनट lucknow

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सुप्रीम कोर्ट की NCLT-NCLAT पर तीखी टिप्पणी, कहा- कॉर्पोरेट मंत्रालय ने पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और उसकी अपीलीय संस्था नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (NCLAT) की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक स्वायत्तता को लेकर गंभीर टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने इन संस्थाओं को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है। अदालत ने इसे ट्रिब्यूनल की स्वायत्तता पर प्रहार बताया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ NCLT और NCLAT में काम कर रहे संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान अदालत ने नियुक्तियों में ट्रिब्यूनल के अध्यक्षों को अधिक अधिकार देने, कर्मचारियों की नियमित भर्ती और प्रतिनियुक्ति के जरिए रिक्त पद भरने जैसे सुझाव दिए।

मंत्रालय के नियंत्रण पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि NCLT और NCLAT जैसी न्यायिक संस्थाओं के अध्यक्षों के पास नियुक्तियों के मामले में पर्याप्त स्वायत्तता होनी चाहिए। अदालत के अनुसार, ट्रिब्यूनल को अपने कामकाज और प्रशासनिक जरूरतों के लिए मंत्रालय पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय इन संस्थाओं पर पूरी तरह नियंत्रण रखना चाहता है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह का नियंत्रण संस्थागत स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।

पीठ ने यह भी सुझाव दिया कि नियमित कर्मचारियों की भर्ती UPSC या SSC जैसी संस्थाओं के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से की जा सकती है। जब तक नियमित भर्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक सरकारी विभागों के अनुभवी अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

संविदा कर्मचारियों की याचिका में नौकरी से हटाए जाने का मुद्दा

यह मामला NCLT और NCLAT में लंबे समय से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों की याचिका से जुड़ा है। कर्मचारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि कई कर्मचारी करीब छह वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उन्हें अचानक नौकरी से हटाना उचित नहीं होगा।

उन्होंने आशंका जताई कि 1 या 2 नवंबर से मौजूदा कर्मचारियों को काम छोड़ने के लिए कहा जा सकता है और उनकी जगह किसी निजी कंपनी के जरिए नई नियुक्तियां की जा सकती हैं। अधिवक्ता ने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तरह HRA और DA जैसे लाभ नहीं मिलते, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद उनके अधिकारों की अनदेखी की जाए।

भर्ती नियमों और विज्ञापन का दिया हवाला

कर्मचारियों की ओर से दलील दी गई कि NCLT के भर्ती नियमों और नियुक्ति संबंधी विज्ञापन में नियमितीकरण का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में कर्मचारियों को अचानक पूरी तरह बाहर करने का फैसला मनमाना हो सकता है।

अधिवक्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई समानता और सार्वजनिक रोजगार से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत हो सकती है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष की मंजूरी के बिना किसी कर्मचारी को सेवा से हटाने का कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।

संविदा व्यवस्था पर CJI ने भी रखी अपनी राय

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संविदा के आधार पर नियुक्तियों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि वे इस तरह की नियुक्तियों के पक्ष में नहीं हैं। सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए मुंबई में सामने आए एक मामले की जानकारी दी, जिसमें उनके अनुसार संविदा कर्मचारी महत्वपूर्ण मूल रिपोर्ट लेकर चले गए थे और बाद में FIR दर्ज करानी पड़ी थी।

CJI ने यह भी कहा कि कुछ संविदा कर्मचारियों के व्यवहार और कामकाज को लेकर न्यायिक तथा तकनीकी सदस्यों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अदालत में टिप्पणी की कि ट्रिब्यूनल के कामकाज में ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं हो सकती।

हालांकि, अदालत की ये टिप्पणियां सुनवाई के दौरान व्यक्त की गई चिंताओं और विचारों के रूप में सामने आई हैं। इन्हें मामले में अंतिम निर्णय या सभी संविदा कर्मचारियों के खिलाफ निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

अध्यक्षों को स्वायत्तता और प्रतिनियुक्ति से नियुक्ति का सुझाव

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NCLT और NCLAT के अध्यक्षों को नियुक्तियों के मामले में अधिक अधिकार देने की बात कही। पीठ ने सुझाव दिया कि सरकारी विभागों में काम कर चुके अनुभवी अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर ट्रिब्यूनल में लाया जा सकता है।

इसके साथ ही UPSC और SSC के जरिए नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी करने का विकल्प भी सुझाया गया। अदालत की चिंता यह थी कि न्यायिक संस्थाओं का प्रशासनिक ढांचा ऐसा होना चाहिए, जिससे उनकी स्वतंत्रता और कामकाज की गुणवत्ता बनी रहे।

NCLT-NCLAT की स्वायत्तता और कर्मचारियों के भविष्य पर नजर

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दो महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। पहला, NCLT और NCLAT की प्रशासनिक स्वायत्तता तथा नियुक्तियों पर मंत्रालय के नियंत्रण का सवाल। दूसरा, लंबे समय से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों की नौकरी और उनके सेवा संबंधी अधिकारों का मुद्दा।

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