नई दिल्ली: अगर आपको रात में लाइट जलाकर सोने की आदत है, तो यह सिर्फ आपकी नींद ही नहीं बल्कि हार्मोनल हेल्थ पर भी असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रात के समय तेज रोशनी में सोने से शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक (सर्केडियन रिद्म) प्रभावित होती है, जिससे कई जरूरी हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है। खासतौर पर महिलाओं में इसका असर मासिक धर्म, प्रजनन स्वास्थ्य और मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ सकता है।
गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार, रात के अंधेरे में शरीर मेलाटोनिन (Melatonin) नामक हार्मोन का उत्पादन करता है। यह हार्मोन अच्छी नींद के साथ-साथ शरीर के हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन यदि कमरे में तेज रोशनी या मोबाइल, टीवी और लैपटॉप की स्क्रीन की रोशनी लगातार बनी रहती है, तो मेलाटोनिन का स्तर कम हो सकता है।
लाइट जलाकर सोने से हो सकते हैं ये नुकसान
- हार्मोनल असंतुलन: मेलाटोनिन कम बनने से एस्ट्रोजन और अन्य हार्मोन्स के संतुलन पर असर पड़ सकता है।
- नींद की गुणवत्ता खराब होना: बार-बार नींद खुलना, गहरी नींद न आना और सुबह थकान महसूस होना।
- मेटाबॉलिज्म पर असर: लंबे समय तक खराब नींद मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को बढ़ा सकती है।
- महिलाओं में पीरियड्स की समस्या: कुछ अध्ययनों में खराब नींद को अनियमित मासिक धर्म और हार्मोनल बदलावों से जोड़ा गया है।
- मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: पर्याप्त और गहरी नींद न मिलने से तनाव, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी हो सकती है।
कैसे रखें हार्मोनल बैलेंस बेहतर?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रात में सोते समय कमरे को जितना संभव हो अंधेरा रखें। यदि पूरी तरह अंधेरा संभव न हो, तो बहुत हल्की नाइट लाइट का इस्तेमाल करें। सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसी स्क्रीन से दूरी बनाना भी फायदेमंद माना जाता है।








