नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर संजय लीला भंसाली की चर्चित फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म रिलीज होने के करीब आठ साल बाद स्वरा की पुरानी आपत्ति एक बार फिर सामने आई है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान…
नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर संजय लीला भंसाली की चर्चित फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म रिलीज होने के करीब आठ साल बाद स्वरा की पुरानी आपत्ति एक बार फिर सामने आई है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने फिल्म में दिखाए गए जौहर के चित्रण पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के दृश्य महिलाओं और यौन हिंसा से बचे लोगों के लिए किस तरह का संदेश देते हैं। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।
जौहर सीन पर क्या बोलीं स्वरा भास्कर?
स्वरा भास्कर ने 31 अगस्त 2026 को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘पद्मावत’ के क्लाइमेक्स में दिखाए गए जौहर के दृश्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दृश्य को देखने के बाद उनके मन में लंबे समय से सवाल रहे हैं कि महिलाओं के सामने सम्मान और जीवन को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है।
उनकी आपत्ति मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि फिल्म में जौहर को जिस तरह प्रस्तुत किया गया, उससे आधुनिक दौर में यौन हिंसा से बचे लोगों के लिए गलत या परेशान करने वाला संदेश जा सकता है।
2018 में भी उठाया था सवाल
यह पहली बार नहीं है जब स्वरा ने ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य पर सवाल उठाया हो। वर्ष 2018 में फिल्म देखने के बाद उन्होंने निर्देशक संजय लीला भंसाली को एक खुला पत्र लिखा था। उस समय भी उन्होंने फिल्म में जौहर के चित्रण को लेकर अपनी असहमति जताई थी और सवाल किया था कि क्या किसी महिला की जिंदगी को उसकी ‘इज्जत’ से जोड़कर देखना उचित है।
उस समय स्वरा की टिप्पणी को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। अब उनके ताजा बयान के बाद आठ साल पुरानी बहस फिर से सोशल मीडिया और फिल्म जगत में चर्चा का विषय बन गई है।
बयान पर क्यों मचा विवाद?
स्वरा के ताजा बयान के बाद आलोचकों का एक वर्ग उनकी ऐतिहासिक व्याख्या पर सवाल उठा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि मध्यकालीन परिस्थितियों को आज के सामाजिक और कानूनी संदर्भों के आधार पर देखने से उस समय की परिस्थितियों की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
वहीं दूसरी ओर, स्वरा के समर्थन में यह तर्क दिया जा रहा है कि ऐतिहासिक घटनाओं को फिल्म में दिखाते समय यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि उसका आधुनिक समाज और विशेषकर महिलाओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। इस तरह विवाद का एक प्रमुख केंद्र इतिहास बनाम आधुनिक सामाजिक दृष्टिकोण बन गया है।
‘पद्मावत’ के लेखक ने भी दी प्रतिक्रिया
स्वरा की टिप्पणी के बाद फिल्म के सह-लेखक प्रकाश कपाड़िया ने जौहर दृश्य का बचाव किया है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा कि फिल्म में उस दौर की वास्तविकता को दिखाने की कोशिश की गई थी और कहानी के ऐतिहासिक संदर्भ को देखते हुए इस दृश्य को पूरी तरह हटाना उचित नहीं होता।
इस प्रतिक्रिया से विवाद को एक नया आयाम मिला है। एक तरफ स्वरा भास्कर फिल्मी चित्रण के सामाजिक प्रभाव पर सवाल उठा रही हैं, वहीं फिल्म के लेखक का पक्ष है कि ऐतिहासिक कथा को उसके समय और परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
स्वरा ने सफाई भी दी
विवाद बढ़ने के बाद स्वरा भास्कर ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उन्होंने रानी पद्मावती को ‘कायर’ नहीं कहा था। उनका कहना है कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने अपने पुराने विचार को दोहराते हुए कहा कि उनकी आपत्ति जौहर की ऐतिहासिक घटना पर टिप्पणी करने से ज्यादा इस बात को लेकर है कि आधुनिक दर्शकों के सामने इस घटना को किस संदेश के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बंटी राय
स्वरा के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं दो अलग-अलग पक्षों में दिखाई दे रही हैं। एक पक्ष उनके सवाल को महिलाओं के अधिकार और यौन हिंसा से बचे लोगों के सम्मान से जोड़कर देख रहा है। दूसरा पक्ष इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को समझे बिना की गई टिप्पणी बता रहा है।
अभिनेता रणवीर शौरी ने भी स्वरा के बयान की आलोचना की है और जौहर तथा आधुनिक समय के यौन हिंसा से जुड़े अनुभवों के बीच तुलना पर सवाल उठाया है।
फिर चर्चा में क्यों आई ‘पद्मावत’?
‘पद्मावत’ वर्ष 2018 में रिलीज हुई थी और इसकी कहानी, ऐतिहासिक संदर्भ तथा जौहर के चित्रण को लेकर रिलीज से पहले ही काफी विवाद हुआ था। फिल्म में दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती, शाहिद कपूर ने महारावल रतन सिंह और रणवीर सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका निभाई थी।
फिल्म के जौहर दृश्य को लेकर स्वरा भास्कर की पुरानी आपत्ति अब उनके नए बयान के कारण फिर चर्चा में है। मौजूदा विवाद सिर्फ फिल्म के एक दृश्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठा रहा है कि ऐतिहासिक घटनाओं को सिनेमा में किस दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाना चाहिए और आधुनिक दर्शकों पर उसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।
विवाद का असली केंद्र क्या है?
पूरे विवाद को देखें तो दो अलग-अलग सवाल सामने आते हैं। पहला सवाल है कि इतिहास में हुई घटनाओं को उनकी तत्कालीन परिस्थितियों के संदर्भ में किस तरह समझा जाए। दूसरा सवाल यह है कि जब वही घटना आधुनिक सिनेमा में दिखाई जाती है, तो क्या फिल्मकारों को वर्तमान सामाजिक संवेदनशीलताओं का भी ध्यान रखना चाहिए।
स्वरा भास्कर का तर्क मुख्य रूप से दूसरे सवाल पर केंद्रित है, जबकि फिल्म के लेखक और आलोचकों का एक वर्ग पहले सवाल यानी ऐतिहासिक संदर्भ को अधिक महत्वपूर्ण मान रहा है। इसी मतभेद के कारण करीब आठ साल पुरानी बहस एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।