ट्रंप की चेतावनी के बीच जेडी वेंस ने भेजा पत्र, कतर-पाकिस्तान समेत पांच देश करा रहे बातचीत; परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर फंसा पेंच
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने के प्रयास भी जारी हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को पत्र भेजे जाने की खबर सामने आई है। वहीं, कतर, पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश किसी समझौते पर पहुंचेंगे या फिर क्षेत्र में एक बार फिर युद्ध भड़क सकता है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी सैन्य कार्रवाई की आशंका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौता नहीं होने की स्थिति में अमेरिका फिर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, संभावित हमलों को लेकर अमेरिकी सैन्य तैयारियों और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और हथियारों की तैयारी से जुड़ी खबरों के बीच इजरायल की मिसाइल सुरक्षा मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली भेजे जाने की भी चर्चा है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ट्रंप ने नए हमलों पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। ऐसे में मध्यावधि चुनावों के बाद हमला होने की आशंका को फिलहाल संभावना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी तय सैन्य कार्रवाई के रूप में। अमेरिका की चेतावनियों के साथ-साथ बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं।
जेडी वेंस ने ईरान को क्यों भेजा पत्र?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ट्रंप के निर्देश पर ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से जुड़े मोहसेन रेजाई को पत्र भेजा है। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने का रास्ता तलाशना बताया जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है।
पत्र भेजे जाने को बातचीत की दिशा में एक कदम माना जा सकता है, लेकिन इससे किसी समझौते पर सहमति बन जाने की पुष्टि नहीं होती। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
कतर, पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की की मध्यस्थता
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने के लिए कई देश सक्रिय बताए जा रहे हैं। इनमें कतर, पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कतर के वार्ताकारों ने तेहरान में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत कर समझौते की संभावनाओं पर चर्चा की है।
मध्यस्थ देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तें हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार और परमाणु कार्यक्रम को लेकर रियायतें दे। दूसरी ओर, ईरान अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और विदेशों में रोकी गई अपनी धनराशि जारी करने की मांग कर रहा है। ऐसे में मध्यस्थ ऐसा रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे दोनों पक्षों को कुछ राहत मिले और सैन्य टकराव टाला जा सके।
समझौते में परमाणु निरीक्षण और प्रतिबंधों पर चर्चा
संभावित समझौते के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों की पहुंच बहाल करना एक अहम मुद्दा बताया जा रहा है। प्रस्ताव पर चर्चा में निरीक्षण की अनुमति के बदले कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत देने की संभावना भी शामिल है।
ऐसी व्यवस्था के तहत ईरान को तेल निर्यात और जरूरी मानवीय वस्तुओं की खरीद में राहत मिल सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्ष इन शर्तों पर सहमत होंगे या नहीं। अमेरिका परमाणु कार्यक्रम पर ठोस आश्वासन चाहता है, जबकि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के पूरे भंडार को सौंपने जैसी शर्तों पर सहमत होने को लेकर सतर्क है।
काहिरा समझौते को दोबारा लागू करने की कोशिश
रिपोर्ट में सितंबर 2025 में ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बीच काहिरा में हुए समझौते का भी जिक्र है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ईरान के परमाणु ठिकानों पर निरीक्षण दोबारा शुरू करने का रास्ता तैयार करना था। बाद में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से जुड़े घटनाक्रम के बाद यह व्यवस्था प्रभावित हुई।
IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी के बयान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि काहिरा समझौते को फिर लागू करने से परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की प्रक्रिया बहाल करने में मदद मिल सकती है। यदि इस दिशा में सहमति बनती है, तो यह व्यापक बातचीत के लिए आधार तैयार कर सकती है। हालांकि, निरीक्षण बहाल होना अपने आप में अमेरिका और ईरान के बीच पूरे विवाद का समाधान नहीं होगा।
ईरान का रुख: रक्षा के लिए तैयार, बातचीत का रास्ता भी खुला
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश अपनी रक्षा के लिए तैयार है, लेकिन कूटनीति को सफल होने का मौका भी देना चाहता है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि ईरान संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर सतर्क है, लेकिन मध्यस्थों के जरिए बातचीत की संभावना भी बनाए रखना चाहता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावों पर ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी अहम होगी। इसलिए आगे की बातचीत इस बात पर निर्भर कर सकती है कि तेहरान किन शर्तों को स्वीकार करता है और अमेरिका बदले में कितनी राहत देने को तैयार होता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर नाकेबंदी तक, तीन बड़े मुद्दे
रिपोर्टों में युद्ध समाप्त करने के संभावित प्रस्ताव के तहत तीन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा का जिक्र है। पहला, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल करना। दूसरा, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मांग। तीसरा, परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत आगे बढ़ाना।
इन मुद्दों पर सहमति बनने से क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन प्रस्ताव की समयसीमा, शर्तों और दोनों देशों की अंतिम मंजूरी को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए किसी निश्चित तारीख तक युद्ध समाप्त होने या नया हमला शुरू होने का दावा करना जल्दबाजी होगी।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर भड़केगी जंग?
फिलहाल अमेरिका की सैन्य चेतावनियों और कूटनीतिक बातचीत के प्रयास एक साथ चल रहे हैं। एक ओर ट्रंप समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं, तो दूसरी ओर मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान भी अपनी रक्षा की तैयारी के साथ बातचीत का विकल्प खुला रखने की बात कह रहा है।
अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों, रोकी गई धनराशि और समुद्री नाकेबंदी जैसे मुद्दों पर कोई साझा रास्ता निकलता है या नहीं। फिलहाल न तो नए अमेरिकी हमले की अंतिम पुष्टि है और न ही किसी अंतिम शांति समझौते की घोषणा हुई है।