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कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस को झटका! बैलेट पेपर पर BJP-JDS गठबंधन का प्रदर्शन, कांग्रेस की सीट भी गंवाई

कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका! बैलेट पेपर की जंग में BJP-JDS गठबंधन का दबदबा, कांग्रेस के हाथ से अपनी सीट भी निकली।

Pawan Kumar

• रिपोर्टर व न्यूज़ संपादक

4 मिनट बेंगलुरु

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कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस को झटका! बैलेट पेपर पर BJP-JDS गठबंधन का प्रदर्शन, कांग्रेस की सीट भी गंवाई

बेंगलुरु। कर्नाटक में विधान परिषद (MLC) की चार सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस शासित कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल सेक्युलर (JDS) के गठबंधन ने बढ़त बनाई है। उपलब्ध चुनावी जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JDS उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को हराकर कांग्रेस से यह सीट छीन ली। वहीं, पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार एस.वी. संकानूर ने जीत दर्ज की।

इन चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ था। नतीजों के बाद JDS ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि जब चुनाव बैलेट पेपर से हुए, तब कांग्रेस की हार के लिए क्या तर्क दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से अलग-अलग चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

 बेंगलुरु शिक्षक सीट पर JDS की जीत

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JDS उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस प्रत्याशी और मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को पराजित किया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट प्राप्त हुए। इस तरह रंगनाथ ने 908 मतों के अंतर से जीत हासिल की।

इस परिणाम को कांग्रेस के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि इस सीट पर पार्टी के मौजूदा एमएलसी चुनाव मैदान में थे। JDS की जीत के बाद गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे अपनी चुनावी सफलता के रूप में पेश किया।

 पश्चिम स्नातक सीट पर भाजपा के संकानूर विजयी

पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार एस.वी. संकानूर ने कांग्रेस के मोहन लिम्बिकाई को 9,323 मतों के अंतर से हराया। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, वरीयता मतों की गिनती पूरी होने के बाद संकानूर की जीत सुनिश्चित हुई।

इस निर्वाचन क्षेत्र में धारवाड़, हावेरी, गदग और उत्तर कन्नड़ जिले शामिल हैं। जीत के बाद संकानूर ने इसका श्रेय मतदाताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की मेहनत को दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने पिछले चुनावों की तुलना में इस बार कड़ी मेहनत की, जिसका परिणाम जीत के रूप में सामने आया।

 अन्य सीटों पर भी भाजपा की स्थिति मजबूत

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के शशिल जी नमोशी ने जीत दर्ज की। दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा उम्मीदवार केएम सुरेश को कांग्रेस प्रत्याशी शशि हुलिकुंते मठ के मुकाबले बढ़त मिलने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, इस सीट के अंतिम नतीजे की पुष्टि के लिए आधिकारिक चुनाव परिणाम देखना जरूरी है।

इन चुनावों से जुड़ी शुरुआती जानकारी में भाजपा और JDS गठबंधन के प्रदर्शन को मजबूत बताया गया। चुनावी नतीजों का अंतिम आकलन सभी सीटों के आधिकारिक परिणाम सामने आने के बाद ही किया जाना चाहिए।

 JDS ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

चुनाव परिणामों के बाद JDS नेता निखिल कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया मंच X पर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस EVM को लेकर सवाल उठाती रही है, लेकिन इस बार चुनाव बैलेट पेपर से हुए और इसके बावजूद JDS उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने जीत दर्ज की।

निखिल कुमारस्वामी ने अपने संदेश में कांग्रेस से सवाल किया कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव में हार के बाद अब पार्टी क्या तर्क देगी। उन्होंने एपी रंगनाथ के साथ भाजपा और JDS के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई भी दी।

यह बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है। बैलेट पेपर से हुए चुनाव का परिणाम अपने आप में EVM से जुड़े व्यापक दावों को साबित या खारिज नहीं करता; ऐसे दावों का मूल्यांकन संबंधित साक्ष्यों और चुनावी प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाना चाहिए।

 कर्नाटक की राजनीति में क्या है इस नतीजे का संदेश?

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के परिणामों ने कांग्रेस, भाजपा और JDS के बीच राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दिया है। कांग्रेस को बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी सीट गंवानी पड़ी, जबकि भाजपा ने पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की। इन परिणामों को लेकर गठबंधन के नेता अपनी-अपनी राजनीतिक व्याख्या सामने रख रहे हैं।

हालांकि, विधान परिषद की सीमित सीटों के नतीजों से पूरे राज्य के राजनीतिक माहौल या भविष्य के विधानसभा चुनावों के परिणाम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल इन चुनावों का प्रमुख असर कांग्रेस और विपक्ष की चुनावी प्रक्रिया पर जारी बहस में दिखाई दे रहा है।

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