कहते हैं जब प्यार सच्चा हो तो धर्म की बेड़ियां भी उसे पाने से नहीं रोक पातीं. भारत के कई ऐसे क्रिकेटर हैं, जिन्होंने मजहब की दीवार तोड़कर शादी रचाई. मौजूदा भारतीय क्रिकेट टीम की बात करें तो ऑलराउंडर शिवम दुबे अपने से 6 साल बड़ी मुस्लिम लड़की के प्यार में बोल्ड हुए और सात फेरे लिए. आज हम एक ऐसे ही भारतीय क्रिकेटर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे अपने दोस्त की बहन से प्यार हुआ और फिर उसी के साथ जन्मों जन्म के बंधन में भी बंधे. दरअसल, यह स्टोरी अपनी तेज इनस्विंग गेंदों से बल्लेबाजों के छक्के छुड़ाने वाले पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीम इंडिया के मौजूदा चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की है. कहानी की शुरुआत 90 के दशक में हुई. मुंबई के रहने वाले मजहर गडियाली एक घरेलू क्रिकेटर थे और क्रिकेट के मैदान पर उनकी गहरी दोस्ती हुई एक उभरते हुए तेज गेंदबाज अजीत अगरकर से. अजीत अक्सर मजहर से मिलने जाते थे और इसी दौरान उनकी मुलाकात मजहर की बहन फातिमा से हुई. फातिमा एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट थीं और अक्सर अपने भाई के मैच देखने मैदान पर जाया करती थीं, जहां अजीत अपनी स्विंग गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान कर रहे थे. वहीं पर फातिमा की सादगी ने अजीत का दिल जीत लिया. अजीत और फातिमा की दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदलने लगी. साल 1998 में जब अजीत ने इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा, तब फातिमा उनके लिए सबसे बड़ी सपोर्ट सिस्टम बनकर उभरीं. लेकिन इस प्यार की राह इतनी आसान नहीं थी. अजीत एक हिंदू पंडित परिवार से ताल्लुक रखते थे और फातिमा एक मुस्लिम परिवार से थीं. उस दौर में अलग-अलग धर्मों में शादी करना आज के मुकाबले कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण था. कई लोग इस रिश्ते के खिलाफ थे, लेकिन अजीत ने ठान लिया था कि वह अपनी जिंदगी के इस सबसे महत्वपूर्ण ‘विकेट’ को हाथ से जाने नहीं देंगे.अजीत और फातिमा ने फैसला किया कि वे धर्म की दीवार को अपने बीच नहीं आने देंगे. उन्होंने अपने परिवार को मनाया और साबित किया कि उनका रिश्ता सिर्फ भावनाओं पर टिका है. 2001 में उनके रिश्ते की चर्चा पूरे देश में होने लगी. आखिरकार साल 2002 में दोनों ने एक सादे समारोह में शादी कर ली. शादी बहुत ही निजी रखी गई, जिसमें सिर्फ करीबी दोस्त और रिश्तेदार शामिल हुए. शादी की रिसेप्शन पार्टी में पूरी भारतीय टीम शामिल हुई थी. पिछले 21 सालों से अजीत और फातिमा एक-दूसरे का हाथ थामे हुए हैं. उनका एक बेटा भी है, जिसका नाम राज है.अगरकर का इंटरनेशनल करियर 16 साल का रहा. उन्होंने अपने 16 साल के करियर में 26 टेस्ट, 191 वनडे (ODI) और 4 टी-20 मैच खेले. वनडे क्रिकेट में वह भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज हैं. उन्होंने 1999, 2003 और 2007 के वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया. साथ ही, वह 2007 में पहला टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा भी थे.
दोस्त की बहन से प्यार, नहीं रोक पाई हिंदू-मुस्लिम की 'दीवार'
कहते हैं जब प्यार सच्चा हो तो धर्म की बेड़ियां भी उसे पाने से नहीं रोक पातीं. भारत के कई ऐसे क्रिकेटर हैं, जिन्होंने मजहब की दीवार तोड़कर शादी रचाई. मौजूदा भारतीय क्रिकेट टीम की बात करें तो ऑलराउंडर शिवम दुबे अपने से 6 साल बड़ी मुस्लिम लड़की के प्यार में बोल्ड…
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V K Singh
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